बुंदेलखंड में हैं रंगमंच की अपार संभावनाएं- ज्ञानेंद्र बुंदेला।

 

कोंच- ( जालौन ) 27.06.2020- भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) कोंच इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय ऑनलाइन थिएटर कार्यशाला के चौथे दिन कार्यशाला प्रशिक्षक, फिल्म एवम् टी वी अभिनेता आरिफ शहडोली ने रंगकर्मियों को प्रशिक्षित करते हुए कहा कि नाटक शारीरिक एवं मानसिक सक्रियता का नाम है। प्रत्येक कलाकार को रंगकर्म करते समय ध्यान रखना चाहिए कि हरकत करिए, बरकत होगी अर्थात् पात्रों के अनुसार, भाव भंगिमा रखनी चाहिए तथा संवाद उसके अनुरूप संप्रेषित करने चाहिए, इससे नाटक का प्रभाव दर्शकों पर ज्यादा पड़ता है। उन्होंने रंगकर्मियों को मंच सज्जा तथा मेकअप के प्रकारों आदि के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला के अतिथि वक्ता एवं गैंग्स ऑफ वासेपुर, धड़क, ओ हमसफ़र जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की धाक जमा चुके बुंदेलीबुड सुपर स्टार एवम् दृष्टि थियेटर के डायरेक्टर ज्ञानेंद्र बुंदेला ने कहा कि बुंदेलखंड में रंगमंच की अपार संभावनाएं हैं, किन्तु दो चार नाटक करने के बाद यहां का रंगकर्मी मुंबईया सिनेमा की ओर आकर्षित हो जाता है और मुंबई की चकाचौंध से समायोजन न कर पाने के कारण वापिस लौट आता है, फिर वह थियेटर में भी सक्रिय नहीं रह पाता। उन्होंने कहा कि रंगकर्मियों को हमेशा आशावादी होना चाहिए और जीवन संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए।
कार्यशाला संयोजक एवं इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष डॉ मुहम्मद नईम बॉबी ने संचालन, संरक्षक अनिल कुमार वैद ने स्वागत एवं महासचिव राशिद अली ने आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला का प्रारम्भ रंगकर्मियों द्वारा इप्टा गीत ‘‘बजा नगाडा शान्ति का, शान्ति का, शान्ति का’’ की प्रस्तुति से हुआ। रंगकर्मी युनूस मंसूरी ने जनगीत प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में इप्टा कोंच, झांसी, उरई, छतरपुर के रंगकर्मियों ने सहभागिता कर रंगकर्म के गुर सीखे।

संपादक  संतोष कुमार निरंजन।

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