उत्तरप्रदेश कालपी जालौन

जुलाई आते ही शिक्षा के माफियाओं के फर्जी दुकानें हुई चालू

*जुलाई आते ही कालपी में धड़ल्ले से शुरू हो गया लुटेरों का धंधा,अभिभावकों को मान्यता प्राप्त बताकर की जा रही है जमकर ठगी*

*मान्यता हिंदी माध्यम प्राप्त,फिर भी धड़ल्ले से चल रहे अंग्रेजी माध्यम*

*मान्यता आठ तक होने के बावजूद भी संचालित हो रही विद्यालय में इंटरमीडिएट तक कक्षाएं*

*कालपी में शिक्षा माफिया अपनी दबंगई से चला रहे है गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय*

*कार्यवाही के नाम पर होती है महज खानापूर्ति,नोटों के बंद लिफाफे मिलते ही बंद हो जाती है अधिकारियों की जुबान*

*बड़ा सवाल-आखिर कब तक शिक्षा माफिया बच्चों के भविष्य के साथ करते रहेंगे खिलवाड़*

*ज्ञात हो कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी नवीन सत्र का आगाज होते ही अतार्थ जुलाई आते ही कालपी में शिक्षा माफियाओं द्वारा अभिभावकों को लूटने का धंधा शुरू हो गया है जिसमे गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभिभावकों को चापलूसी कर अपनी ओर आकर्षित कर लूटने में कोई कसर नही छोड़ते है वहीं कालपी के चर्चित विद्यालय तहसील परिसर के पीछे संचालित जी.सी.आर शिक्षण संस्थान जिसकी मान्यता आठ तक होने के बावजूद भी इंटरमीडिएट तक कक्षाएं संचालित हो रही है वहीं कालपी का दूसरा विद्यालय चर्चित चौराहा मुन्नाफुल पावर के समीप गैर मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम दयानंद बाल विद्या मंदिर जिसकी मान्यता केवल हिंदी माध्यम की है लेकिन शिक्षा माफिया अपनी दबंगई व बेसिक शिक्षा अधिकारी के आशीर्वाद से खुलेआम अंग्रेजी माध्यम संचालित कर रहे है।*

*वहीं आपको बता दें कि हर वर्ष बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार शाही जुलाई आते ही न्यूज़पेपर व चैनलों की सुर्खियों में आने के लिए दिखावा के लिए अपनी नाकारा फौज के साथ आते है लेकिन ऐसा नही है कि पद के एवज में मिलने वाली रकम से जिम्मेदारी का निर्वाहन नही होता,होता है आते है साहेब सुनते है व्यथा,मिलते है विद्यालय के प्राधानाध्यपकों से,चाय की चुस्कियों में दब कर रह जाती है जुबान,गाड़ी का करते है शीशा बंद और निकल जाते है,ये दौर अबसे थोड़ा ही चल रहा है लंबे वक्त से यही हालात है,अभिभावक बर्बाद हो रहे है शिक्षा माफिया आबाद हो रहे है पर कोई सुनने को तैयार नही।एक घर,एक बच्चे के अभिभावक की व्यथा की कथा नही है ये,पूरा नगर आज इसी नासूर से पीड़ित है,विरोध के नाम पर अधिकारी आवाज ज्यादा बुलंद नही कर सकते वरना शिक्षा माफियाओं की फौज चमड़ी उधेड़ने को तैयार है तो गांधी के देश मे गांधी का तरीका अपनाया जाता है मतलब रिजर्व बैंक के ठप्पे वाले नोटों का बंद लिफाफा डालते है जेब के अंदर और हो जाते है रफूचक्कर क्योंकि वैसे भी रिजर्व बैंक के ठप्पे वाले नोटों के बदन से दब चुकी अधिकारियों की जुबान चलती कहाँ है।*

*वहीं आपको बताते चलें कि अप्रैल आते ही विद्यालय के प्रधानाचार्य अपने विद्यालय के प्रचार-प्रसार के लिये घर-घर जाकर रंग-बिरंगे पम्प्लेट छपवा कर अभिभावकों को विद्यालय की फर्जी सुविधायें बताकर अपनी ओर आकर्षित कर लेते है लेकिन अब सवाल ये उठता है कि आखिर कब तक शिक्षा माफिया बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे और कब तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति कर अपनी जेब गर्म करते रहेंगे ये तो आगामी समय ही तय करेगा।

रिपोर्ट-शिवम गुप्ता

संपादक अनिल नीखरा ,संतोष कुमार निरंजन आजतक मीडिया।

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