उत्तरप्रदेश कोंच जालौन

ग्राम प्रधान की उपेक्षा का दंश झेल रहे ग्राम लौना के कुँए।

बिकास खण्‍ड के ग्राम लौना में प्रधान और सचिव की बेशरमाई के कारण कुंओं का अस्तित्‍व खतरे में पड़ गया है। भले ही शासन की तरफ से कुंओं की साफ सफाई कराकर उनका पानी पीने योग्‍य बनाने की बात की जाती हो लेकिन शासन प्रशासन की इस मंशा पर ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की खाऊ कमाऊ नीति के चलते फिलहाल कुंओं के अस्तित्‍व पर संकट मड़रा रहा है।

हम आपको बताते चलें कि कोंच विकास खण्‍ड के ग्राम लौना में कुंओं की दुर्दशा हो रही है। जीर्णोद्धार के नाम पर गॉव में स्थित कुंओं पर कुछ भी नहीं किया गया है। कुंआ के घाट पर गोबर पड़ा हुआ है और चारा भी जम आया है। हालांकि शासन इन कुंओं के जीर्णोद्धार करने की बात भले ही करता है लेकिन सचिव और प्रधान की तो मंशा यही दर्शाती है कि कुंओं का जीर्णोद्धार न हो बल्कि इन कुंओं का उद्धार ही हो जाये अर्थात यह कुंआ जमींदोज ही जाये। इन कुंओं की साफ सफाई न होने से भूजल स्‍तर गिरने की सम्‍भावना ज्‍यादा रहती है। भूजल स्‍तर गिरने से बचाने के लिये फिलहाल ग्राम लौना में कोई ठोस प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। क्‍या अच्‍छा होता अगर प्रधान और सचिव इन कुंओं का जीर्णोद्धार कराके स्‍वच्‍छ पानी इन कुंओं से निकलवाने का प्रयास करते तो भीषण गर्मी में जहॉ सरकारी हैण्‍डपम्‍प तक जबाब दे जाते हैं वहॉ पर इन कुंओं के पानी का इस्‍तेमाल करके ग्रामीण जनता पेयजल के लिये परेशान न होती। फिलहाल ग्राम लौना में बने कुंओं के जीर्णोद्धार की आवश्‍यकता है प्रशासन को इस ओर ध्‍यान देना होगा कि आखिर क्‍यों इन कुंओं की साफ सफाई पर ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है और साथ ही साथ कुंओं की अन्‍देखी करने वालों के खिलाफ दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की भी आवश्‍यकता है।
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*कुंआ बने हैं कचड़े का गढ्डा,🗑🗑🗑🗑

जिस तरह से आज के दौर में सरकारी कार्यालयों और घरों में कचड़ा आदि डालने के लिये छोटे छोटे डस्‍टबिन रखे रहते हैं उसी प्रकार ग्राम लौना में कुंआ बड़े डस्‍टबिन बने हुये हैं। लोग अपने घर का कूड़ा करकट भी इन कुंओं में डाल देते हैं और इन कुंओं का उपयोग वह डस्‍टबिन के रूप में कर रहे हैं। कुंआ के घाटों पर डला हुआ गोबर इन कुंओं के घाटों की शोभा बढ़ा रहे हैं अगर इन कुंओं की साफ सफाई करवा दी जाती और इनमें से पानी निकलता तो यह कुंआ डस्‍टबिन बनने से जरूर बच जाते लेकिन जिस गॉव का ग्राम पंचायत सचिव पब्लिक का फोन ही न उठाता हो और जन समस्‍याओं से उसे मतलब ही न हो तो उस गॉव में यह सब होना लाजमी है। मजदूरों की जगह राक्षस का दर्जा प्राप्‍त दैत्‍याकार जेसीबी मशीन से काम कराना प्रधान और सचिव की आदत बना हो तो उस गॉव का विकास कैसे होगा, कैसे इस गॉव के मजदूर सुखी रहेगें।

 

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