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उत्तरप्रदेश कालपी जालौन

तमाम मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं कालपी के लोग।

संपादक   – संतोष कुमार निरंजन।

कालपी (जालौन)  ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान रखने वाला कालपी नगर आज भी तमाम मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है ईस नगर की पहचान तो बहुत पुरानी है लेकिन इस नगर को आज तक जो आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाई है जिससे कालपी क्षेत्र पिछड़े क्षेत्रों की श्रेणी में गिना जाता है।

कालपी नगर की ऐतिहासिक तौर पर बहुत ही पुराने समय से पहचान है यहां नजदीक ही कालपी से 2 किलोमीटर दूर मदारपुर गांव है जिसे चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जन्मस्थली कहा जाता है जहां दक्षिण भारत के लोगों द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से एक भव्य बाल व्यास मंदिर का निर्माण भी कराया गया है वही कालपी से पूरब की ओर करीब 12 किलोमीटर दो बहुत प्राचीन सूर्य मंदिर होने की भी बात कहीं जाती है सूर्य मंदिर के लिए मानना है कि इस सूर्य मंदिर को कृष्ण के पुत्र साम्य द्वारा बनवाया गया था जिसके अवशेष आज भी यमुना नदी के किनारे शेष है। शहंशाह अकबर के विशेष सलाहकार बीरबल की जन्मस्थली भी कालपी को माना जाता है। कालपी के दक्षिण दिशा में चौरासी गुंबद जो बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक है जिसमें आज भी 84 गुम्मद के ऊपर बना है जिसमें करीब 400 वर्ष पूर्व कालपी सूबे के राजा इब्राहिम लोधी एवं उसके भिश्ती की मजार आज भी बरकरार है। अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में महारानी लक्ष्मी बाई ने कालपी में अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे तथा यमुना नदी के किनारे 100 फीट ऊंची कगार पर बने दुर्ग में जिस की दीवारें 10 फीट मोटी है मैं नाना साहब तात्या टोपे आदि योद्धाओं ने मंत्रदा कर अंग्रेजों को खदेड़ा था वह दुर्ग भी कालपी की ऐतिहासिकता को दर्शाता है इसके अलावा करीब 150 वर्ष पूर्व बनी ऐतिहासिक लंका मीनार जो पूरे देश में अपनी एक अनु ठी पहचान है आदि दर्जनों ऐतिहासिक इमारतें वह पहचान कालपी को बताने के लिए पर्याप्त हैं इन सबके बावजूद धीरे धीरे कालपी अपनी पहचान खोती जा रही है साथ ही कालपी को मिलने वाली मूलभूत समस्याओं से भी वंचित रखा जा रहा है यहां का प्रमुख लघु एवं कुटीर उद्योग हाथ कागज उद्योग कालीन उद्योग व कपड़ा उद्योग लगभग बंद सा हो चुका है यहां के ना तो जनप्रतिनिधियों को और ना ही सरकारों को कालपी की मूलभूत समस्याओं की चिंता है और नाही कालपी के उड़ते हुए ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को बचाने का समय।

इन तमाम ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहरों को समेटे कालपी की आवादी लगभग 80000 है इसके बावजूद ना तो इस नगर में आज तक किसी ने एक बस स्टॉप बनवाने की चिंता की और शिक्षा के नाम पर कोई भी आईसीएससी अथवा सीबीएसई स्कूल यहां खोले गए और तो और यहां पर ना तो कोई पार्क बनवाया गया और ना ही खेल का कोई मैदान बनवाया गया। कहने को तो यहां पर झांसी कानपुर के बीच एक रेलवे स्टेशन जरूर बना है लेकिन ट्रेनों के स्टॉपेज के नाम पर मात्र दो तीन ट्रेनों को यहां पर रोका जाता है ज्यादातर ट्रेनों क्या यहां पर स्टॉपेज ना होने से लोगों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है। इतना पुराना ऐतिहासिक नगर होने के बाद भी यहां के लोग आज भी मूलभूत समस्याओं के लिए परेशान हैं।

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