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उत्तरप्रदेश कालपी जालौन

बाईजी मंदिर की संस्थापिका इंद्रा बाई का 90 वर्ष की आयु में निधन।

संपादक – संतोष कुमार निरंजन

 

कालपी – बचपन से अपना घर बार छोड़कर कालपी के यमुना तट पर अपना स्थान बनाने वाली इन्द्राबाई बाई जी जिसे बाई जी के मन्दिर के रूप में जाना जाता है।90 वर्ष की आयु में बीती रात्रि ब्रम्हलीन हो गई।बडी़ सख्यां में साधु सन्तों की मौजूदगी में उनका यमुना तट पर अन्तिम संस्कार सनातन धर्म के अनुसार उनके शिष्य शशि ने मुखाग्नि देकर किया।* *बुधवार की रात्रि अपना सारा जीवन कालपी जैसी रमणीक स्थली के यमुना तट पर बिताने वाली नगर की पहली महिला तेज तर्रार संत अपनी 90 वर्ष की आयु पूर्ण करते हुये ब्रम्हलीन हो गई।उन्होने रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान कालपी नगर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।नगर ही नहीं जनपद व बुन्देलखण्ड के नेता उन्हें मानते थे।आज उनका अन्तिम संस्कार पवित्र यमुना तट पर बडी सख्यां में मौजूद सन्त समाज की मौजूदगी में किया गया।उनके अन्तिम दर्शन के लिये बडी़ सख्यां में महिलाएं उपस्थिति थी।इस दौरान महामण्डलेश्वर लक्ष्मी नारायण मन्दिर रामकरन दास जी महाराज,मां वनखण्डी देवी शक्ति पीठ के महन्त जमुनादास जी महाराज,नरसिंह टीला महन्त सक्सेना बाबा,फक्कड़ बाबा कुटिया के राजा बाबा,कुन्नू महाराज,गूदड़ स्थान के राघवदास जी महाराज,हरिश्चन्द्र दीक्षित,मलखान सिंह यादव, भारतसिंह यादव,रमेश यादव,आसू यादव,पुष्पेन्द्र सिंह, अरविन्द यादव,अतुल सिहं महेवा, धर्मैन्द्र सिंह राजा ढांवा,रामबाबू निषाद,देवेन्द्र गुप्ता,नीतू गुप्ता,दिग्विजय सिंह,नीलाभ शुक्ला,अशोक तिवारी, देवेन्द्र अवस्थी,रमेश यादव आदि बडी सख्यां मे लोग मौजूद रहे।

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