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उत्तरप्रदेश कालपी जालौन

करोड़ो की लागत से बनी उपगल्ला मंडी आठ सालो से वीरान।

संपादक – संतोष कुमार निरंजन

कालपी (जालौन) किसानो के हितो को मद्देनज़र रखकर कालपी तहसील के अलग – अलग स्थानों मे 8 साल पहले निर्मित कराई गयी उपखण्ड ग़ल्ला मंडी बीते 8 वर्षो से वीरान पड़ी हुई है। ग़ल्ला का व्यवसाय ना होने से उपमंडियो की उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह लग रहे है।

विदित हो कि गांव स्तर पर किसानो को 3 सकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिये बुंदेलखंड विशेष पैकेज से कालपी तहसील के अलग – अलग ग्रामो छोक, परासन, इटौरा भदरेखी कोढ़ा, कीर्रही, सिकरी रहमान आदि मे उपमंडियो का निर्माण करोड़ो रुपए की लागत से वर्ष 2012 मे शासन स्तर से कराया गया था। उपमंडियो के परिसर मे व्यापारियों के लिये दुकाने, नीलामी चबूतरा समेत कई सुख सुविधाओं के इंतज़ाम शासन द्वारा कराये गये थे। लेकिन आठ वर्ष गुजर जाने के बाद मे उपमंडियो मे कारोवार की शुरुआत तक नहीं हो सकी है।

एक मंडी मे चल रहा कारोवार, अन्य उपमंडी को करेंगे विकसित -सचिव

कृषि उत्पादन मंडी समिति कालपी के प्रभारी सचिव रवि कुमार पटेल ने बताया कि केवल इटौरा उपमंडी मे ही गल्ले का कारोवार व्यवसाइयों के द्वारा किया जा रहा है। अन्य मंडियों मे कोई भी लाइसेंस नहीं है। उन्होंने कहा कि नया अध्यादेश आ चुका है। उपमंडियो को विकसित करने के प्रयास कराये जायेंगे।

 

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