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जनपद इटावा की एकमात्र एतिहासिक ‘चुगलखोर की मजार’ का होगा सौंदर्यीकरण

 

संपादक – संतोष कुमार निरंजन

इटावा (यूपी) ऐतिहासिक ‘चुगलखोर की मजार’ की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए चंबल फाउंडेशन के संयोजक शाह आलम ने नगर पालिका अध्यक्ष से मुलाकात की। नगर पालिका अध्यक्ष ने इतिहास की अलहदा सी कहानी समेटे हुए इस ऐतिहासिक विरासत को निखारने का भरोसा दिलाया।
‘चंबल टूरिज्म’ ने इसे हाल में ही अपने पर्यटन मानचित्र पर इस धरोहर को विशेष जगह दी है। दरअसल चुगलखोर की मजार पर हर किसी के पहुंचकर पांच जूते-चप्पल मारने की परंपरा है। किस्से कहानियों में भी इस तरह के मिसाल नहीं मिलती। हैरत की बात है कि मौत के बाद किसी से इतनी नफरत कैसे हो सकती है? मजार पर जूते मारने के पीछे नसीहतों भरी कहानी छिपी हुई है। वर्ष 1950 में कृपा नारायण पाठक द्वारा लिखित और प्रकाशित पुस्तक ‘इटावा जनपद के हजार साल’ में जिक्र किया गया है कि जब सन् 1194 में मुहम्मद गौरी ने पूरी तैयारी और ताकत के साथ आसई पर हमला बोल दिया था तब राजा जयचंद और उनके साथियों ने इटावा में गौरी की सेना का उसी की भाषा में जवाब दिया। इटावा के चौहान राजा सुमेर शाह भी इसी युद्ध में जयचंद का साथ दिया था लिहाजा सुमेर सिंह का किला भी तोप की मार से ज़मीदोज़ कर दिया गया था।

राजा सुमेर शाह की कमजोरियों का भेद भोला सैय्यद नाम के एक खुफिया ने गौरी को दिया था। यह फकीर भेष में कई महीने पूर्व ही किला के मुख्य द्वार के पास ही एक मड़ैया डाल कर रहने लगा था। जिस व्यक्ति के द्वारा भोला सैय्यद को यह खुफिया जानकारी प्राप्त हुई थी वह दतावली गांव का रहने वाला एक मुंशी था। जो राजा सुमेर शाह का पुराना कर्मचारी था। चुगलखोर से खफा राजा सुमेर शाह को जब इस बात का पता चला कि उनके विश्वासपात्र मुंशी ने दगाबाजी की है। राजा का हुक्म हुआ कि मुंशी को तब तक पीटा जाए जब तक उसकी मौत न हो जाए। उसके बाद उसका मकबरा बनाकर शिलालेख लगा दिया गया था। तभी से राजा से मिली चुगलखोरी की सजा मुंशी को आज भी बदस्तूर हर व्यक्ति जूते मार कर देता है। उस मुंशी की मजार आज भी इटावा शहर में बसरेहर वाली सड़क पर दतावली गांव के पास मौजूद है जो चुगलखोर की मजार के नाम से प्रसिद्ध है। वक्त के थपेड़ों में शिला का पता नहीं और देखरेख के अभाव में मकबरा भी जीर्ण-शीर्ण हो रहा है। आस-पास झाड़ियां उग आई हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा जुगरामऊ स्थित चुगलखोर के मजार की साफ-सफाई और सौन्दर्यीकरण का जिम्मा लेने से यह विरासत चमकेगी। नई पीढ़ी इस अजूबे धरोहर के प्रेरणादायी इबारत से वाकिफ होगी।

मंडल ब्यूरो वीरेंद्र सिंह सेंगर।

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