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आखिर मधुसूदन डेयरी सबसे महंगा दूध जांच का विषय,पराग भी मान रही हार किसान परेशान।

संपादक – संतोष कुमार निरंजन

चकरनगर/इटावा। जनपद और विषेश रूप से चंबल वैली पंचनद धाम क्षेत्र में दुग्ध उत्पादक किसान इस समय बेहद पशोपेश और भारी परेशानी में पड़े नजर आते हैं। नाना प्रकार की आई दूध डेयरियों के संस्थान जिनकी फ्रेंचाइजी आफिस संबंधित स्थानों में स्थापित हैं। इन संस्थानों के चक्कर लगा लगा कर लोग सीमा से ज्यादा परेशान हैं, पर इन संस्थानों के हेड ऑफ डिपार्टमेंट किसी भी समस्या का समाधान न देकर उसे उलझाने का प्रयास करते हैं। कुछ डेयरियां(दुग्ध संग्रह केंद्र)जो ग्राहकों से दूध निम्न स्तर पर लेतीं हैं, 1-2 डेरियां ऐसी है जो ऊंचे दामों पर दूध खरीद कर अन्य डेयरी संचालकों को जहां मुसीबत के कटघरे में खड़ा कर रहीं हैं वहीं दूसरी तरफ दूग्ध उत्पादक किसान दर-दर की ठोकरें खाकर पैसे भी गमा बैठता है।
बताते चलें कि औरैया जिले के पंचनद क्षेत्र के कुछ गांवों में तो किसान मरने की कगार पर है क्योंकि दूध 35 रुपए लीटर बिकने से संबंधित पशु का दिन भर का भोजन भी पूरा नहीं हो सकता है इसलिए दिन पर दिन इस क्षेत्र के किसानों की आय में गिरावट जारी रहने के कारण किसान मौत के कगार पर है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जनपद इटावा के अंतर्गत कई ऐसी डेयरियां काम कर रहीं हैं कि जो अपने मनमाने तरीके के रेट देकर जहां किसानों को लुभावना पन देकर उन्हें परेशान और मुसीबत की कड़ियों में जकड़ देतीं हैं,हद तो यह है कि दूधिया लोगों की मनमानी के चलते दूध 35 रुपए लीटर में देने को मजबूर है दुग्ध मूल्य कम होने से किसान दूधाधारी पशु नहीं पालता है किसान नित्य डेयरियों के बदलाव से बेहद परेशान हैं कहीं कोई ना तो शिकायत सुनने वाला है और यदि कहीं शिकायत की जाती है तो उस पर कोई खास अमल नहीं होता है। डेयरियों के संचालन/स्थापन के समय यह तय किया जाता है कि कस्टमर केयर का नंबर या शिकायत घर का नंबर सभी जगह सार्वजनिक होगा किसी भी कहीं भी डेयरी पर शिकायत कर्ताओं को शिकायत के लिए कोई भी नंबर उपलब्ध नहीं है,और ना ही दुग्ध वाहनों पर नंबर नोट हैं। अब हम बात करते हैैं डेयरी से संबंधित शिकायत के लिए संबंधित अधिकारियों के नंबर जो नेट से प्राप्त हुए अरुन जो इस्पेक्टर हैं उनका तो नंबर ही नहीं लगता एक नादिर अली जो हेडक्वार्टर इटावा लिखा हुआ है वहां से नंबर प्राप्त करने पर जो लगाया जाता है तो नादिर अली बोलते हैं कि मैं कासगंज से बोल रहा हूं अब आप शिकायत के लिए जिलाधिकारी महोदय इटावा से संपर्क करें। इतने सारे कार्य कहीं चुनाव कहीं और भी तमाम वैश्विक महामारी से संबंधित समस्याएं जिलाधिकारी के पास इतना समय कहां कि वह डेयरियों की समस्याओं से संबंधित शिकायतों का भी निस्तारण करें आखिर यह विभाग किस लिए बनाया गया?जब इनका सदुपयोग उपभोक्ता नहीं कर पा रहा है। बकेवर कस्बे में स्थापित कुछ डेरियों की जिसमें पराग डेयरी एक सरकारी उपक्रम है जिसमें लेट लतीफी पेमेंट्स मिलना, निम्न स्तर से किसानों को पेमेंट करना जिससे इस डेरी पर दूध की मात्रा में भारी कमी आई है। इसके साथ साथ अमूल/आनंदा/सहेज न जाने कितने नाम से बहुत सारी डेरियों की फ्रेंचाइजी आफिस खुले हुए हैं। जब इन्होंने क्षेत्र में आकर पहले अपने पैर रखे थे तो दूधियों को बहुत बड़ी सुविधाएं प्रलोभन के साथ दी थीं जैसे ही दूध बढ़ने लगा तो कहीं डेरियों के पैसे अटक गए तो कहीं उन्हें नाहक परेशान कर पेमेंट दिया गया।

इस समय कस्बा बकेवर से संबंधित मधुसूदन डेयरी का फ्रेंचाइजी ऑफिस खुला हुआ है जहां पर सबसे महंगा दूध लिया जाता है इससे हो क्या रहा है कि होड़ बाजी के चलते जो सही और स्थाई डेयरियां हैं वह अपना मुनाफा कमाना तो दूर की बात खर्चा निकालना भी मुशीबतों से भरा हुआ है। ‌वहीं लाखों के घाटे में आकर या तो ऑफिस बंद कर दिए हैं या किसानों/दूधियों को परेशान करना शुरू कर दिया है। बीते दिनों एक पत्रकार टीम ने बकेवर में नई स्थापित डेयरी मधुसूदन पर वहां के मैनेजर संजीव कुमार से वार्ता की और उनसे पूछा कि आपके यहां जो ऊंचे दामों पर दूध खरीदा जाता है इतने ऊंचे दामों पर दूध को खरीद कर आखिर इसका क्या होता है?जो अन्य डेयरी संचालकों की डेयरियां हैं वह निष्क्रिय हो गई हैं, मैनेजर ने चुप्पी साध ली और यह बोला कि आप लोग बैठिए चाय मंगाता हूं जब टीम ने यह कहते हुए कि आपके यहां मिलावटी दूध/सिंथेटिक दूध तैयार किए जाने की शिकायत सामने आई है तो मैनेजर ने बात को घुमाते हुए की यह शिकायत नाजायज है। फिर जब टीम ने यह पूछा कि कुछ सूत्रों से जानकारी मिली है इसमें क्या सच्चाई है कि बीते दिनों एक गाड़ी औरैया जनपद मैं संबंधित अधिकारी ने सैंपलिंग के लिए रोकी तो आपने वहां पर जाकर गाड़ी को छुड़ाने के लिए ₹5000 का रिश्वत देकर छुडवाई जो बेहद शर्मनाक है।इससे साबित होता है कि आप थोड़ा दूध खरीद कर उच्च रेटों में फिर इसमें बड़ी मात्रा में दूध सिंथेटिक तैयार कर बाजारों में सप्लाई किया जाता है।तो मैनेजर ने कोई खास जवाब नहीं दिया।

सूत्रों का मानना है कि यहां पर एक बात जो जांच का विषय है कि जो गाड़ी औरैया जनपद में पकड़ी गई थी 8 और 9 फरवरी के लगभग मैनेजर के कॉल डिटेल और सुपरवाइजर के कॉल डिटेल से यह बात खुलकर सामने लाई जा सकती है।दूध डेयरी के छोटे-छोटे संचालकों ने मधुसूदन डेयरी पर आरोप लगाते हुए कि यह डेयरी जब से आई है तब से पूर्व से चल रही डेरियां नेगेटिव मेप पर पहुंचकर भारी घाटे के शिकार में दाखिल हुईं हैं।

मानपुरा डेयरी संचालक राजेश मिश्रा ने बताया कि मैं पराग संस्थान बकेवर से जुड़ा हुआ विगत कई वर्षों से कार्य कर रहा हूं संस्थान के हमारे पास हजारों रुपए कीमत के उपकरण भी लगे हुए हैं लेकिन जब डेरी ही घाटे में जा रही है तो हमारे पास जहां पर सैकड़ों लीटर दूध था वहां आज मात्र 10 लीटर ही रह गया है मजबूरन डेरी का काम रुकता हुआ नजर आ रहा है आज नहीं तो कल इसी प्रकार से कुछ अन्य डेयरी संचालकों ने मधुसूदन डेयरी पर यह प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कि आखिर यह डेयरी महंगा दूध किस बुनियाद पर खरीद रही है यह एक जांच का विषय है। जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी इटावा को चाहिए कि संबंधित खाद्य इंस्पेक्टर को निर्देशित कर ऊंचे दामों में खरीदने वाली डेरियो सभी डेरिया की सैंपलिंग करा कर उनका परीक्षण किया जाए कि कौन-कौन सी डेयरिया मिलावटी दूध तैयार कर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।

वीरेंद्र सिंह सेंगर की ख़ास रिपोर्ट।

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