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उत्तरप्रदेश कालपी जालौन

विश्व के सबसे विलक्षण देश में निवास करते हैं हम जिसके स्वर्णिम अतीत की गौरव गाथा सारा विश्व जानता है।

कालपी (जालौन) भारत देश एक धर्म प्रधान देश है जहां हर धर्म हर संसकृति को समान रूप से सम्मान मिला है।
सौभाग्यशाली हैं हम जो हम विश्व के ऐसे विलक्षण देश में निवास करते हैं जिसे विश्व गुरू कहा गया और जिसके स्वर्णिम इतिहास की गौरव गाथा सारा भूलोक जानता है।
आज से नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्रि पर्व प्रारम्भ हो गया है देश में शक्ति पर्व के रुप में मनाया जाने वाला नवदुर्गा महोत्सव अध्यात्मिक उत्थान का पर्व तो है ही साथ ही इस पर्व में मां की महत्ता को भी अत्यधिक प्रधानता दी गई है।भारत में मां को जो स्थान प्राप्त हैवह शायद ही किसी दूसरे देश में हो।हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हम विश्व केऐसे विलक्षण देश में निवास करते हैं जिसके स्वर्णिम अतीत की गौरव गाथा सारा विश्व जानता है।इतना ही नहीं इस धरती के अनेक देश भी भारत के इस सत्य को वर्तमान में सहज भाव से स्वीकारने लगे हैं।एसे में हम सभी का यह स्वाभाविक कर्तव्य बनता है कि हम अपनी चेतन शक्ति को प्रकट कर अपने आराध्य केंन्द्रो का पूर्ण मनोयोग से अर्चन बन्दन करें और देश की भलाई का मार्ग प्रशस्त करें।हम भारत वासियों ने अपने देश को भारत माता का दर्जा देकर उसकी पूजा की है देश के कई स्थानों पर भारत माता के मन्दिर भी हैं।भारत माता की आराधना का भावार्थ यही है कि देश केह नागरिकों में समानता का भाव बना रहे सभी मिलजुल कर रहें। ऐसा करने पर समाज में समता का भाव स्थापित होगा।
आइए अब बात करते है नवरात्रि की आराधना की दृष्टि से नवदुर्गा महोत्सव को तीन भागों में विभक्त किया गया है। जिसके अन्तर्गत नौ दिनी महोत्सव को तीन तीन में विशेष देवी की पूजा आराधना का विधान है प्रथम तीन दिन मां काली की आराधना के लिए रखे गए हैं। जिसमें मूल बात यह है कि सबसे पहले व्यक्ति अपने मन के विकारों को दूर करे। प्रथम तीन दिनों में व्यक्ति का मन पूरी तरह विकार रहित हो जाना चाहिए। तभी हमारी आगामी पूजा का सफल मार्ग तैयार हो सकता है।यदि मन में किसी प्रकार का विकार है य देवी स्वरूपा नारी य मासूम बालिकाओं के पर्ति पूजनीय भाव नहीं है तो व्यक्ति को देवी पूजा से अपने को पृथक कर लेना चाहिए।वैसे भी पूजा के बारे में पहले से ही माना गया है कि व्यक्ति पूरे मन से स्वार्थ रहित पूजा करे तभी उसका अपनेक्षित फल प्राप्त होता है।
दूसरे तीन दिन लक्ष्मी पूजा का बिधान है व्यक्ति विकारों से दूर होकर लक्ष्मी की पूजा करता है तो उसकी आराधना सफल होगी । यहां विशेष बात यह है कि व्यक्ति धर्म सम्मति धन उपार्जन करने की ओर प्रवति हो। इस आराधना में व्यक्ति अपने देश ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए धन संपदा की मांग करता है।देश की सम्पन्नता के साथ व्यक्ति का सीधा जुडा़व होता है।इस लिए यह पूजा व्यक्ति सम्पन्नता में भी सहायक होती है।
इसी प्रकार अंतिम तीन दिन मां सरस्वती को समर्पित रहते हैं।जो व्यक्ति को ज्ञान और विवेक से परिपूरित करती है। सच्चे मन और पूर्ण भक्ति भाव से इन नो दिनों की पूजा से व्यक्ति के मन में किसी प्रकार का कलुषित विकार नहीं रहता है। इस पूजा में तीन तीन दिनन की इस संकल्पना में पूरी तरह से धर्म का आधार बनाया गया है।
अंत में यही कहना चाहूँगा कि जिस प्रकार भगवान य देवीय शक्ति के लिए सारी दुनियां एक है उसी प्रकार भगवान द्वारा पैदा किए गए व्यक्ति भी एक ही परिवार का हिस्सा हैं।वह किसी भूमि य जाति की दीवारों में कैद नहीं होना चाहिए ।
हमारे देश में बालिकाओं को देवी के रुप में पूजा जाता है ।बालिका रूपी नन्हीं दुर्गा जब मनुष्य को आशीर्वाद देती है तब व्यक्ति की आध्यतामिक प्रगति को कोई ताकत नहीं रोक सकती।इस लिए हमें अपने संस्कारों का पालन करते हुए पूर्ण मनोयोग योग से ध्यान लगा कर इस नवदुर्गा के पवित्र नौ दिनों पूजा अर्चन करना चाहिए।

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