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चंबल वैली पंच नाथ धाम में बसता है अलौकिक अनूठा और अविस्मरणीय संसार जहां मिलते हैं पौराणिक ऐतिहासिक और पुरातत्व स्थान।

 

क्षेत्र में अनेकों पवित्र पौराणिक ऐतिहासिक और धार्मिक वृक्षों, औषधि और वन संपदा का है अनूठा संसार

चंबल वैली औरैया यूपी। विश्व मानचित्र पर अपना महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला पुरातत्व प्राचीन पूरा ऐतिहासिक चंबल वैली क्षेत्र जो राजस्थान से चंबल नदी के रास्ते होकर के उत्तर प्रदेश के औरैया इटावा और जालौन की सीमा पर लगभग समाप्त होता है इस क्षेत्र में धार्मिक पौराणिक पुरातत्व और ऐतिहासिक स्थलों के अलावा हजारों पौराणिक और पवित्र वृक्ष हैं जो अपने धार्मिक पौराणिक होने की कहानी आज भी बयां कर रहे हैं और हिमालय से उद्गम होने वालीं नदियों यमुना चंबल के कारण औषधियों से भरपूर यह क्षेत्र अति महत्वपूर्ण है।
बताते चलें कि पश्चिम धाम पर स्थित बाबा साहब मंदिर पर पीपल का वृक्ष जिसके नीचे तुलसीदास जी ने रामायण के कुछ अंश लिखें और इस क्षेत्र में पाई जाने अति महत्वपूर्ण पीलवा के वृक्ष जो हजारों वर्ष पुराने हैं इनके नीचे ऋषि-मुनियों ने कभी तपस्या की और तो और जनपद इटावा में पीलवा के नाम से युवा वाले हनुमान जी का सुप्रसिद्ध मंदिर है जहां बताते हैं कि स्वयं हनुमान जी लड्डू का भोग लगाते हैं और स्वास भी लेते हैं इसके अलावा इस क्षेत्र के अनेक इतिहास से जुड़े तथ्य हैं कहते हैं कि अज्ञातवास के समय में पांडवों ने अज्ञातवास का समय इसी पंचनद धाम क्षेत्र में व्यतीत किया और यहां स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भगवान भोले नाथ की स्थापना कर वरदान मांगा था और इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण तथ्य तो इस बात का है किस क्षेत्र में हिमालय से उद्गम होने वाली नदियों यमुना चंबल के कारण औषधीय पौधों का इस क्षेत्र में अधिक पाया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसके लिए यहां पर अक्सर औषधि के बारे में जानने वाले वैद्य घूमते और खोज करते हुए नजर आ जाएंगे जो लोगों का उससे उपचार करते हैं।

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