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उत्तरप्रदेश कालपी जालौन

अपने अस्तित्व को बचाने की आस में केन्द्रीय मंत्री के दर्शर्नो को लालायित पूरी तरह नष्ट होती ऐतिहासिक पौराणिक महत्व की नगरी कालपी की अरूण पुकार।

कालपी (जालौन) जिस नगर ने अपने अतीत के स्वर्ण युग को देखा आज वह नगर अपने अस्तित्व अपनी पहचान को भी खोता धूल धूसरित होता देख कर खून के आंसू रो रहा है । देश और दुनिया में जिन निशानियों जिन स्थानों पर गर्व करता था आज उन्हीं को खण्डहर होते देखने वाले शहर को अब भी उम्मीद है कोई मसीहा आएगा जो हमारी रक्षा करेगा हमारे अंगो को टुकड़ोटुकड़ो में बिखरने से संभालेगा हमारे प्रानो की रक्षा करेगा।
आज इस शहर के प्रतिनिधि को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिला बेचारे कालपी ने सपने देखने प्रारंभ कर दिए और एक उम्मीद की किरण जगमगाई अब मैं बच जाऊंगी ।
इसके पहले भी एक बार ऐसा ही सपना देखा था जब एक लाल को अपने आंचल में प्राथमिक शिक्षा देकर उत्तर प्रदेश की राजनीति के शिखर पर बैठा देखा था जो सत्तारुढ़ दल के मुखिया और प्रदेश सरकार के मंत्री बने पर उनका रास्ता देखते देखते बेचारे कालपी की नजरें पथरागंई पर आना तो दूर की बात अपनी कलम की दो पैसा की स्याही तक खर्च नहीं की जिसमें नगर के किसी विकास कार्य के पत्र पर हस्ताक्षर कर देते ।जबकि नगर में सबसे बड़ी और विकट समस्या है रोडवेज बस स्टैंड का न होना और महोदय रोडवेज विभाग के ही मंत्री बने पर आह रे कालपी का दुर्भाग्य नेता जी ने धेला भर भी नहीं सोचा।
आज फिर कालपी की बूढ़ी होती आंखों में हल्की सी रोशनी की किरण जगमगाई जब सुना कि हमने जिस सांसद को एक दो बार नहीं पांच बार देश की सबसे बड़ी पंचायत का सदस्य बनाया और आज वह केन्द्र सरकार में मंत्री बन गए पुनः: कालपी के ह्रदय में हलचल मचने लगी।

और टूटती सांसों से मंत्री जी से पुकारा करने लगी हे देश की सबसे बड़ी पंचायत के सभासद देश की सरकार के मंत्री जी अब मेरा भी उद्धार करो मेरी टूटती हुई सांसों को आक्सीजन दो और मुझे पुनःअपने पैरों पर खड़ी होकर चलने फिरने लायक कर दो श्री मान आज मुझे शर्म आती है जब कोई बाहरी मेहमान हमरे यहां आता है और हमारे पुराने वैभव हमारे पुराने इतिहास को देखता हैं और बाद में हमारे वर्तमान को देखता है तो लगता है चुल्लू भर पानी में डूब मरूं।आज मुझे अपने जिन अंगों पर घमंड था सारे अंग नष्ट हो रहे हैं आज हमारे आंचल में चलने लायक भी कोई सड़क य रास्ता नहीं बचा आज हम किसी मुसाफिर को छाया में भी नहीं बिठा सकते और नहीं कह सकते थोड़ा यहां आराम से बैठ जाओ बस आती ही होगी चलें जाना। आज हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा अच्छा खेल का मैदान नहीं दे पा रहे आज हम अपने व्यापारियों को सही और सुरक्षित हाट नहीं दे पा रहे आज जिस कपड़ा कागज कालीन के उत्पादन में हजारों हमारे मजदूर युवा कारीगर बच्चे रोजगार पाते थे बेरोजगार होकर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए हैं जिनके नाम से देश विदेश में लोग मुझे उद्योग नगरी के नाम से जानते थे सब भूलते जा रहे हैं। सब कुछ खोते जा रहे हैं। और अब क्या बचा मेरे आंचल में जिसपर हम गर्व करें बस हड्डियों का ढांचा भर है यही बचा रहे बस इतनी सी आरज़ू है माननीय मंत्री महोदय इस दीन दुखी की ओर एक नजर निहार लो और हो सके तो जीवन दान दें दो में महिर्षि वेद व्यास की जन्म भूमि हूं में सूर्य नगरी हूं में रानी लक्ष्मीबाई की रण स्थली हूं में पीर फकीरों का पाक भूमि हूं में मन्दिरों के हिसाब से छोटी काशी हूं। में लंका मीनार चौरासी गुम्बद सूर्य मन्दिर श्री दरवाजा, रंगमहल जैसी विश्व विख्यात धरोहरों की मालकिन हूं।और कितना परिचय दूं अपना। मंत्री जी मेरी रक्षा करो में अपने जीवन की भीख मांगती हूं मुझे बचालो मेरा उद्धार करो।

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