इस्लामाबाद (एजेंसी):
इस्लामाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश बाबर सत्तार की कानून की डिग्री रद्द कर दी गई है। पाकिस्तान बार काउंसिल ने उनकी डिग्री से जुड़ी शिकायतें मिलने के बाद यह बड़ा फैसला लिया है। इसके साथ ही उनके न्यायिक कार्यों पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस बाबर सत्तार को 32 वर्ष पहले येल यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री मिली थी। लेकिन हाल ही में इस डिग्री को लेकर विवाद सामने आया, जिसके चलते बार काउंसिल ने जांच के बाद इसे अवैध करार दे दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में कहा गया था कि जस्टिस सत्तार ने डिग्री हासिल करने के बाद पाकिस्तान में बतौर वकील रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था और न ही आवश्यक लाइसेंसिंग प्रक्रिया का पालन किया था। यही नहीं, उन्होंने देश में कानून की शिक्षा या पेशेवर प्रशिक्षण से जुड़ी शर्तों को भी पूरा नहीं किया।
इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक ने इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करते हुए बाबर सत्तार के कर्तव्यों के निर्वहन पर रोक लगा दी है।
बाबर सत्तार ने 2021 में बतौर न्यायाधीश शपथ ली थी और वे पाकिस्तान के न्यायिक व्यवस्था में तेज़ी से उभरते नामों में से एक माने जा रहे थे। उनकी नियुक्ति को लेकर भी पहले विवाद खड़े हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें नियमित रूप से नियुक्त कर दिया गया था।
अब इस नई कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी न्यायपालिका एक और गंभीर विवाद में घिर गई है। कई कानूनी विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है और इसे न्यायपालिका की साख के लिए झटका बताया है।
बाबर सत्तार की डिग्री की मान्यता खत्म होने के बाद अब यह देखा जाएगा कि 29 सितम्बर को उनकी सुनवाई की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी।
