चेन्नई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी दरों में 22 सितंबर से होने वाले बदलाव की खासियत बताई। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव देश के हर नागरिक के जीवन को प्रभावित करेगा। उन्होंने मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जीएसटी दरों में बदलाव करने के पीछे दिए गए तर्क को स्पष्ट किया। सीतारमण ने कहा कि यह निर्णय देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी था।
वित्त मंत्री ने कहा कि अब तक कई वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी से बाहर रखा गया था, जिससे कर संग्रहण में कमी आ रही थी। नए बदलावों के बाद अब अधिक वस्तुएं और सेवाएं जीएसटी के दायरे में आएंगी। उन्होंने बताया कि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस बदलाव का समर्थन किया है। सीतारमण ने कहा कि अब जीएसटी परिषद हर तीन साल में दरों की समीक्षा करेगी।
उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग राज्यों के स्तर पर लगने वाली कर प्रणाली के बजाय केवल 5 और 28 प्रतिशत की दरें लागू होंगी। इससे व्यापारियों को कर प्रणाली समझने में आसानी होगी। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तुओं पर 28 प्रतिशत जीएसटी नहीं लगाया जाएगा।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का खंडन करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से भ्रामक है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद से कर संग्रहण में वृद्धि हुई है, और इसका सीधा लाभ राज्यों को मिला है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि कर संग्रहण बढ़ने के कारण राज्यों को अधिक वित्तीय सहायता मिल रही है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2022 से अब तक राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से 1.35 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता दी गई है।
