कानपुर देहात, 18 नवंबर। जनपद में आगामी चुनावों के लिए मतदान व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता में कल (17 नवंबर) को मतदेय स्थलों के अंतिम निर्धारण पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
📐 1200 से अधिक मतदाताओं वाले केंद्रों पर फोकस
माँ मुक्तेश्वरी देवी सभागार कक्ष में आयोजित इस बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अमित कुमार और सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन मतदेय स्थलों का पुनर्गठन करना था, जहाँ 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति के अनुसार मतदाताओं की संख्या 1200 से अधिक पाई गई थी।
जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों (रसूलाबाद, अकबरपुर-रनियां, सिकंदरा और भोगनीपुर) में कुल 1577 मतदेय स्थल संचालित हैं। भीड़ कम करने और मतदाताओं की सुविधा के लिए 89 नए मतदेय स्थलों के सृजन पर विचार किया गया है।
🛠️ सुविधाओं का सत्यापन और अंतिम रूपरेखा
जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि 29 अक्टूबर से 4 नवंबर तक सभी मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन और भवनों का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान आयोग के मानकों के अनुरूप दिव्यांगजन की पहुँच, सुरक्षा, विद्युत और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित किया गया।
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आपत्ति प्रकाशन: प्रस्तावित मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची का प्रकाशन 10 नवंबर को किया जा चुका है और प्रतियाँ राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई गई हैं।
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अंतिम तिथि: प्राप्त होने वाली आपत्तियों और सुझावों के निस्तारण के बाद, मतदेय स्थलों की सूची को 18 नवंबर तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
🚶 2 किलोमीटर से अधिक दूरी नहीं
डीएम ने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पुनर्गठन के दौरान एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग अनुभागों में न बंटे और किसी भी मतदाता को मतदान केंद्र तक पहुँचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक दूरी न तय करनी पड़े। उन्होंने जर्जर या सुविधाविहीन भवनों को तत्काल उपयुक्त भवनों में स्थानांतरित करने का भी निर्देश दिया।
📞 मतदाता ऐसे पाएं जानकारी
जिलाधिकारी ने मतदाताओं को सूचित किया कि वे अपनी मतदाता सूची और निर्वाचन से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए जिला कांटेक्ट सेंटर 05111-297056 तथा टोल फ्री नम्बर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं। बैठक में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों (आप, सपा, भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई) के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए, जिनके निस्तारण के लिए उपजिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
