संविधान दिवस पर कलेक्ट्रेट में गूँजा संवैधानिक मूल्यों का संदेश - Aaj Tak Media

संविधान दिवस पर कलेक्ट्रेट में गूँजा संवैधानिक मूल्यों का संदेश

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने दिलाई संविधान की प्रस्तावना के वाचन की शपथ, युवाओं से संवैधानिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान

जनपद जालौन, 26 नवंबर 2025 (सूचना विभाग प्रकाशनार्थ)

भारतीय संविधान के प्रति सम्मान, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आज जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संविधान दिवस का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की रूपरेखा

  • शुभारंभ: जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलन और भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

  • शपथ: जिलाधिकारी ने अधिकारीगण और कर्मचारीगण के साथ मिलकर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक रूप से वाचन किया।

जिलाधिकारी का संदेश

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में संवैधानिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला:

  • संविधान का महत्व: उन्होंने कहा कि संविधान न केवल देश की सर्वोच्च विधिक संरचना है, बल्कि यह भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों का आधार भी है।

  • कर्तव्यों और अधिकारों का संतुलन: उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत काल में हमें संविधान में निहित कर्तव्यों और अधिकारों को संतुलित रूप से समझते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

  • आत्मचिंतन का अवसर: उन्होंने कहा कि संविधान दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के लिए आत्मचिंतन का अवसर है कि क्या हम अपने दायित्वों का पालन कर रहे हैं।

  • युवाओं को संदेश: उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से संदेश दिया कि वे डिजिटल प्रगति, शिक्षा और नवाचार के साथ-साथ अपने संवैधानिक दायित्वों के प्रति भी सजग रहें, क्योंकि भारत का भविष्य युवा शक्ति के हाथों में है।

  • अपील: उन्होंने नागरिकों से समाज में शांति, सद्भाव और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने अधिकारों का उपयोग और कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।

उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संजय कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक योगेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य आदि अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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