रीराइटेड न्यूज़ (पूर्ण प्रोफेशनल स्टाइल):
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों कथित कफ सिरप घोटाले को लेकर उथल-पुथल में है। नकली कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। यही मुद्दा समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने संसद में भी उठाया, जिसके बाद सियासी टकराव और तेज हो गया।
सांसद यादव ने इस घटना को “झकझोर देने वाली त्रासदी” बताते हुए कहा कि “जिन्होंने अपने बच्चे खोए, उनकी पीड़ा शब्दों में नहीं बताई जा सकती।” उन्होंने आरोप लगाया कि जहरीली दवा बनाने वाले सिंडिकेट को पकड़ने में राज्य सरकार नाकाम रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कांड की जाँच सिर्फ राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से होनी चाहिए क्योंकि प्रभावित देशों में उज्बेकिस्तान, पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका तक इसका असर देखने को मिला है।
अखिलेश यादव ने भी यूपी सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि प्रदेश में “दवाइयों का माफिया” सक्रिय है। उन्होंने दावा किया कि नकली दवा कारोबार हजारों करोड़ का है और सरकार इसे रोकने में असफल रही है।
विपक्ष का कहना है कि जिन बच्चों की मौत हुई, उन्हें न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि जहरीली दवाइयों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क पर व्यापक कार्रवाई की जाए ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
उधर, सरकार की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि कफ सिरप घटना को लेकर सरकार की कार्रवाई बेहद धीमी है।
