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इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने अपनी सेना की संरचना में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) नियुक्त कर दिया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सुझाव पर इसकी मंजूरी दी, जो पांच साल के लिए प्रभावी होगी। मुनीर अब आर्मी चीफ और सीडीएफ दोनों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जो जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (सीजेएससी) के पद को खत्म कर एकीकृत कमान का नया दौर शुरू करता है।
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 243 और पाकिस्तान आर्मी एक्ट के तहत की गई है। राष्ट्रपति भवन से जारी बयान में मुनीर को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए “साहसी नेतृत्व” का श्रेय दिया गया, खासकर 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में उनकी भूमिका के लिए। इसके अलावा, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू की सेवा को दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है, जो 19 मार्च 2026 से लागू होगा।
क्यों है यह बदलाव अहम?
- एक नया पद: सीडीएफ नया सुप्रीम कमांडर बनेगा, जो आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की संयुक्त रणनीति तय करेगा। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सेना को और ताकतवर बना सकता है।
- मुनीर का सफर: 2022 में आर्मी चीफ बने मुनीर को मई 2025 में फील्ड मार्शल बनाया गया, जो अयूब खान के बाद दूसरा ऐसा मामला है। वे पहले मिलिट्री इंटेलिजेंस और आईएसआई के हेड रह चुके हैं।
- वायुसेना को एक्सटेंशन: बाबर सिद्दू की नियुक्ति बढ़ाने से हवाई युद्ध क्षमता बरकरार रहेगी, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सीडीएफ के तहत सब कुछ आर्मी-केंद्रित हो सकता है।
प्रधानमंत्री शरीफ ने ट्वीट कर मुनीर को “राष्ट्र की एकता का प्रतीक” बताया, जबकि रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह “ऐतिहासिक जीत” का सम्मान है। विपक्षी दल पीटीआई ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया, लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है।
यह बदलाव 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद आया है, जो सैन्य पदों पर संवैधानिक निगरानी बढ़ाता है। अब नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के नए कमांडर की नियुक्ति बाकी है, जो सीडीएफ के सुझाव पर होगी। पाकिस्तान की सेना अब और मजबूत नजर आ रही है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह शांति की दिशा में कदम है या सत्ता का नया खेल?
