उरई (जालौन ) थाना कोंच क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पचीपुरा कलां निवासी राहुल पटेल ने अपनी पत्नी पर अवैध धन वसूली, झूठे एससी-एसटी व दहेज मुकदमों की धमकी, मानसिक उत्पीड़न तथा जान से मारने की साजिश के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पति ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने एवं सुरक्षा की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक जालौन को लिखित शिकायत दी है। उसने यह भी बताया कि पत्नी शादी के पहले अलग अलग छेड़खानी बलात्कार के मामले लिखाकर वसूली बाद मे समझौता कर लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल पटेल का विवाह वर्ष 2023 में किरन कुमारी पुत्री रामस्वरूप अहिरवार से हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था, जिसे बाद में उप-निबंधक कार्यालय में पंजीकृत भी कराया गया। पीड़ित का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया और वह आए-दिन झगड़ा करने लगी तथा पैसों की नाजायज मांग करने लगी।
राहुल पटेल का कहना है कि जब उसने अवैध मांगें पूरी करने से इंकार किया, तो पत्नी द्वारा झूठे एससी-एसटी एक्ट व दहेज उत्पीड़न के मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाने लगी। इससे वह मानसिक रूप से गंभीर तनाव में आ गया। गृहस्थी बचाने के लिए उसने कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन हालात बद से बदतर होते चले गए।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी के रोहित वर्मा निवासी गड़ेरना मंगरौल, थाना रेढ़र, से अवैध संबंध हैं और वह कई-कई सप्ताह तक घर छोड़कर उसके साथ रहती थी। अक्टूबर माह में पत्नी ने कथित रूप से 10 लाख की सीधी मांग रखी। इनकार करने पर वह घर से जेवरात व कीमती सामान लेकर मायके चली गई और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने लगी।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब पति द्वारा न्यायालय में तलाक का वाद दायर किया गया। आरोप है कि इसकी जानकारी मिलते ही पत्नी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत देकर मामला परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंचा दिया और समझौते के नाम पर ₹10 लाख की शर्त रख दी।
राहुल पटेल का आरोप है कि उसकी पत्नी आपराधिक प्रवृत्ति की है और वह पहले भी लोगों को झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास कर चुकी है। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी द्वारा अराजक तत्वों से पिटवाने और हत्या करवाने की धमकियां दी जा चुकी हैं।मामले में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि पत्नी के पिता रामस्वरूप द्वारा पूर्व में उच्च अधिकारियों को दिए गए शिकायती पत्रों में स्वयं पुत्री के गलत आचरण की बात स्वीकार की गई थी। इन दस्तावेजों को भी पीड़ित ने अपनी शिकायत में संलग्न किया है।अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी निष्पक्षता से जांच कर सत्य सामने लाता है, क्योंकि यह प्रकरण न केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा बल्कि कानून के दुरुपयोग से जुड़ा अहम सवाल भी खड़ा करता है।
