वॉशिंगटन। अमेरिका में एच-1बी वीज़ा धारकों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी कंपनियों ने अब तक 40,000 से ज्यादा आईटी पेशेवरों को नौकरी से निकाल दिया है। खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो एच-1बी वीज़ा पर अमेरिका में काम कर रहे थे।
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि एच-1बी वीज़ा धारकों को रोजगार से वंचित नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें लगातार अवसर मिल रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि 2022 से अब तक कुल 1,698 एच-1बी वीज़ा जारी किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 4,682 तक पहुंच गई। इसी अवधि में लगभग 25,075 लोगों को नौकरियों में समायोजित किया गया।
हालांकि हकीकत यह है कि आईटी सेक्टर में मंदी और ऑटोमेशन की वजह से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और भी बढ़ सकती है। अनुमान है कि 2025 तक अमेरिका में 80 लाख से ज्यादा नौकरियां सिर्फ ऑटोमेशन की वजह से प्रभावित होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी पेशेवर इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ एच-1बी वीज़ा के सहारे अमेरिका में काम कर रहे हैं। नौकरी छूटने के बाद अब इन पर वापस लौटने का खतरा मंडरा रहा है।
