संवाददाता
उरई/जालौन
प्रदेश में पॉली हाउस तकनीक के माध्यम से सब्जियों एवं फूलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। आधुनिक संरक्षित खेती के चलते अब बाजारों में बेमौसम सब्जियों और फूलों की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।
पॉली हाउस एक विशेष संरचना होती है, जिसे 200 से 400 माइक्रॉन मोटाई वाली पराबैंगनी किरणों से अवरोधी पारदर्शी प्लास्टिक शीट से ढका जाता है। इसके माध्यम से फसलों को आवश्यक तापमान, नमी और प्रकाश नियंत्रित रूप से उपलब्ध कराया जाता है। जीआई पाइप से बने पॉली हाउस 20 से 25 वर्ष तक टिकाऊ होते हैं, जबकि बांस व लकड़ी से बने ढांचे अपेक्षाकृत कम समय तक चलते हैं।
पॉली हाउस खेती के माध्यम से किसान विपरीत मौसम में भी सब्जियों व फूलों की खेती कर रहे हैं। इससे फसलों को कीट-रोगों से सुरक्षा मिलती है, उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है तथा प्रति इकाई क्षेत्र में सामान्य खेती की तुलना में 5 से 10 गुना तक अधिक उपज प्राप्त हो रही है। खीरा, शिमला मिर्च, संकर टमाटर जैसी सब्जियों के साथ-साथ गुलाब, जरबेरा, लीलियम व कार्नेशन जैसे फूलों की खेती प्रमुख रूप से की जा रही है।
हालांकि पॉली हाउस खेती में प्रारंभिक लागत अधिक होती है, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर यह तकनीक अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसानों को अनुदान व तकनीकी सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस आधुनिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खुले वातावरण में खेती के दौरान मौसम, कीट और रोगों के कारण फसलों को भारी नुकसान होता है, जबकि पॉली हाउस खेती में इन जोखिमों से बचाव संभव है। यही कारण है कि अब प्रदेश के उन्नतशील किसान पॉली हाउस के माध्यम से न केवल अधिक उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
