कदौरा/जालौन टीकाकरण के बाद मासूम की मौत के मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम मौके पर पहुंची और मासूम के परिजनों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए। परिजनों ने टीकाकरण और कथित लापरवाही को मौत का कारण बताया, वहीं जांच अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर वैक्सीन से मौत होने से इनकार किया है। अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।
टीकाकरण के बाद हुई मासूम की मौत के मामले में गठित जांच टीम ने स्वास्थ उपकेंद्र हरचंदपुर का दौरा कर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। टीम में शामिल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ उदय कुमार , डॉ सर्वेश कुमार, श्यामसुंदर ने पीड़िता के घर पहुंच परिजनों से विस्तार से बातचीत की और उनके लिखित बयान दर्ज किए। परिजनों का आरोप है कि टीकाकरण के बाद आरुषि उम्र 7 माह की तबीयत अचानक बिगड़ी और उसकी मौत हो गई परिजनों ने इसे टीकाकरण और लापरवाही से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
जांच अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में वैक्सीन से सीधे तौर पर मौत होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, पूरी पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित वैक्सीन के नमूने को सुरक्षित रखवा लिया गया है, जिन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला (लैब) भेजा जाएगा। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत का कारण क्या था और वैक्सीन का इसमें कोई संबंध है या नहीं।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि टीकाकरण से पूर्व पीड़िता का स्वास्थ्य इतिहास, टीकाकरण स्थल पर उपलब्ध संसाधन तथा उपचार में किसी प्रकार की चूक की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। प्रशासन ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन देते हुए कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी वहीं जांच अधिकारी डॉ उदय कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया वैक्सीन से मौत नहीं लग रही है क्योंकि उसी वाइल से अन्य को भी पेंटा थर्ड वैक्सीन की डोज दी गई है जिसमें अन्य सभी पूर्णतया स्वस्थ है फिलहाल वाइल को सुरक्षित रख उसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा वही परिजनों से पोष्टमार्टम कराने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने नहीं कराया रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्यवाही की जाएगी
