मनगढ़ंत कहानियों के सहारे संघ पर हमला — असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश - Aaj Tak Media

मनगढ़ंत कहानियों के सहारे संघ पर हमला — असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश

पंकज आनंद अवस्थी

हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक दलों और तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर फैलाई जा रही मनगढ़ंत कहानियाँ और आधी-अधूरी सच्चाइयाँ एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा संघ को लेकर दिए गए हालिया बयानों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि आखिर क्यों कुछ समूह लगातार देश की सबसे पुरानी राष्ट्रवादी संगठन को विवादों में घसीटने का प्रयास करते हैं।

लेखक के अनुसार, जब भी कांग्रेस या विपक्षी दल राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में आते हैं, तब वे संघ और उससे जुड़ी संस्थाओं पर आरोप लगाकर जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने की कोशिश करते हैं। यह रणनीति नई नहीं है — पिछले कई दशकों से यह प्रवृत्ति बार-बार देखी जा रही है।

संघ पर हमला दरअसल एक विचारधारा पर हमला है, जो राष्ट्रनिर्माण, आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और सामाजिक एकता के सिद्धांतों पर आधारित है। आलोचकों का उद्देश्य इस विचारधारा को बदनाम कर देश की जनता के मन में भ्रम पैदा करना होता है।

लेख में यह भी कहा गया है कि आरएसएस ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है, और बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के समाज के हर वर्ग में सेवा कार्य किया है। चाहे प्राकृतिक आपदाएँ हों, युद्धकाल की परिस्थितियाँ या सामाजिक असमानताएँ — संघ के स्वयंसेवक हमेशा राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से काम करते रहे हैं।

लेखक का मानना है कि राहुल गांधी और कुछ अन्य नेताओं द्वारा बार-बार संघ पर निशाना साधना दरअसल उनके राजनीतिक असुरक्षा भाव को दर्शाता है। ऐसे आरोप न तो जनता को भ्रमित कर सकते हैं और न ही संघ की साख को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

लेख में पत्रकारिता की भूमिका पर भी प्रश्न उठाया गया है। लेखक का कहना है कि पत्रकारों का प्रमुख कर्तव्य तथ्यों की खोज और निष्पक्षता से रिपोर्टिंग करना है, न कि किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे के तहत संस्थाओं या विचारधाराओं को बदनाम करना।

लेख के अंत में पंकज आनंद अवस्थी लिखते हैं —

“मुद्दा यह नहीं है कि कौन किस पर आरोप लगा रहा है, बल्कि यह है कि क्या हमें उन संगठनों पर भरोसा करना चाहिए जो दशकों से नि:स्वार्थ भाव से देशसेवा कर रहे हैं, या उन पर जो सस्ती राजनीति के लिए झूठे आरोपों का सहारा लेते हैं।”

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