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काठमांडू: नेपाल ने चीन से कोरला नाका मार्ग खोलने के संबंध में बातचीत की है। अगर चीन की मंजूरी मिल जाती है तो कैलाश मानसरोवर यात्रा और नेपाल-चीन व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। नेपाल की ओर से यह मुद्दा हाल ही में संपन्न हुई सीमा वार्ता के दौरान उठाया गया।
नेपाल सरकार का मानना है कि कोरला नाका मार्ग खोलने से न सिर्फ श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान भी सुगम होगा।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, “दोनों देशों के बीच इस विषय पर सकारात्मक चर्चा हुई है और चीन ने इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।”
कैलाश मानसरोवर के तीर्थयात्रियों के लिए राहत
कैलाश मानसरोवर की यात्रा लगभग 300 किलोमीटर और चीन सीमा से करीब 1000 किलोमीटर लंबी है। वर्तमान में भारतीय यात्री नेपालगंज या हिल्सा मार्ग से होकर गुजरते हैं, जो अत्यंत कठिन और मौसम पर निर्भर है।
नेपाल सरकार का कहना है कि अगर कोरला नाका खोला गया तो यात्रा का रास्ता छोटा, आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
कोरला मार्ग न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक रूप से भी अहम है। इस मार्ग से व्यापार और पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है। चीन और नेपाल दोनों देशों की सीमावर्ती अर्थव्यवस्था इससे लाभान्वित होगी।
सूत्रों के अनुसार, नेपाल ने यह भी सुझाव दिया है कि 2023 में बंद हुए सीमा मार्गों को भी फिर से खोला जाए ताकि दोनों देशों के बीच संपर्क सामान्य हो सके।
नेपाल सरकार का कहना है कि इस कदम से पारंपरिक व्यापारिक संबंध फिर से मजबूत होंगे और स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
