उरई (जालौन), 18 नवंबर। जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों के लिए जालौन जिले के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को कल (18 नवंबर) नई दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया गया। विज्ञान भवन में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में डीएम को जल संरक्षण में जिले को तीसरा स्थान दिलाने के लिए प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और दो करोड़ रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया।
🏞️ 83 KM लंबी नून नदी को किया पुनर्जीवित
जालौन जिले को यह गौरव मुख्य रूप से नून नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जनभागीदारी पर आधारित मॉडल विकसित करने पर मिला है।
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पहल: जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में 83 किलोमीटर लंबी नून नदी को पुनर्जीवित करने का ऐतिहासिक जन आंदोलन चलाया गया, जिसका अस्तित्व वर्षों से संकट में था।
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सफलता: जन भागीदारी आंदोलन के कारण आज यह नदी पुनर्जीवित हो चुकी है, जिससे बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित जालौन जिले में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की समस्या से बड़ी राहत मिली है।
💧 जनभागीदारी से बदला जल संकट का मॉडल
डीएम ने बताया कि उन्हें यह राष्ट्रीय जल पुरस्कार वॉटर हार्वेस्टर और वॉटर रिचार्जिंग को लेकर किए गए कार्यों के लिए दिया गया है।
उनके कार्यकाल में जिले में बड़े पैमाने पर चेकडेम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों का सुंदरीकरण और जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया गया। इन प्रयासों से पानी की बचत बढ़ी और जिले का जल स्तर भी सुधरा।
यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल जिलाधिकारी के नेतृत्व को दर्शाता है, बल्कि जल संरक्षण में जालौन की जनता की सक्रिय भागीदारी का भी परिणाम है।
