लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2021 की पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा का पेपर लीक घोटाला अब तक का सबसे बड़ा एसआईएफआर बन गया है। 27 अक्टूबर को एक ही दिन में पूरे प्रदेश में 40 हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं। यह देश के इतिहास में एक दिन में सबसे ज्यादा एफआईआर का रिकॉर्ड है।
क्या हुआ था 27 अक्टूबर को? चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में एक साथ सभी थानों में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, कानपुर, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुरादाबाद, बस्ती, देवीपाटन, आजमगढ़, चित्रकूट, मिर्जापुर समेत सभी 75 जिलों में एक साथ मुकदमे दर्ज किए गए।
कितने लोगों पर केस?
- कुल नामजद और अज्ञात मिलाकर 1 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी-धांधलीबाजों पर मुकदमा
- 11 दिसंबर तक मौजूदा मतदाता सूची में से 16 दिसंबर को प्रकाशित होने वाली फाइनल सूची में 14 फरवरी 2026 तक कोई भी नया नाम जुड़ेगा तो उसके खिलाफ भी तुरंत एफआईआर होगी
- अब तक 40,000+ एफआईआर, आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 1 लाख पार कर जाएगा
चुनाव आयोग ने क्यों लिया इतना सख्त कदम? 2021 की SI भर्ती में हुए पेपर लीक और धांधली के जरिए जिन अभ्यर्थियों ने गलत तरीके से नौकरी पाई, वे अब मतदाता सूची में भी शामिल हो गए हैं। चुनाव आयोग का मानना है कि ऐसे लोग वोटर लिस्ट को दूषित कर रहे हैं। इसलिए सभी 75 जिलों में एक साथ कार्रवाई की गई।
अब आगे क्या होगा?
- जिन अभ्यर्थियों के नाम मतदाता सूची में हैं, उनके वोटर आई-कार्ड जब्त
- नौकरी से बर्खास्तगी की प्रक्रिया तेज
- सभी नामजद-अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित
यूपी में एसआई भर्ती घोटाला अब सिर्फ नौकरी घोटाला नहीं, लोकतंत्र पर हमला बन चुका है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है – “जो गलत तरीके से नौकरी लेकर वोटर बना, उसका नाम मतदाता सूची से भी काटा जाएगा और जेल भी भेजा जाएगा!”
यूपी में एसआईएफआर का तूफान अभी और तेज होने वाला है।
