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कानपुर देहात, 11 नवंबर 2025।
प्रदेश को दिसंबर 2027 तक बाल श्रम से मुक्त करने के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को साकार करने की दिशा में कानपुर देहात प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता में “जिला टास्क फोर्स” की पहली बैठक मां मुक्तेश्वरी सभागार, माती, कानपुर देहात में संपन्न हुई।
बैठक का उद्देश्य जनपद को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त करने हेतु प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना था। बैठक की शुरुआत सहायक श्रमायुक्त राम अशीष द्वारा एजेंडा बिंदुओं के अनुसार की गई, जिसमें बाल श्रमिकों की स्थिति, नियोजन स्थलों की समीक्षा, और विगत माह में हुए निरीक्षणों पर विस्तृत चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित सभी विभागीय अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों को निर्देश दिए कि वे विभागीय समन्वय के माध्यम से एक वृहद कार्ययोजना तैयार करें।
उन्होंने कहा कि बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ा जाए तथा उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति का आकलन कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर बाल श्रम की संभावनाएं अधिक हैं, वहां व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि नियोक्ताओं, अभिभावकों और आम जनमानस में बाल श्रम के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी लक्ष्मी एन. ने विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से चिन्हित बाल श्रमिकों के पात्र परिवारों को आच्छादित करने के निर्देश दिए। वहीं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हिमांशु कुमार सिंह ने बाल श्रम रोकथाम से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अमित कुमार एवं अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) दुष्यंत कुमार मौर्य ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर ऐसी कार्ययोजना तैयार करें, जिससे जनपद को समयबद्ध अवधि में बाल श्रम से मुक्त कराया जा सके।
बैठक में मुख्य रूप से मुख्य विकास अधिकारी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सभी उपजिलाधिकारी, अधिशासी अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, बाल कल्याण समिति, एएचटीयू, ग्रामीण मजदूर संगठन, भारतीय मजदूर संगठन के प्रतिनिधि तथा श्रम प्रवर्तन अधिकारीगण एवं अन्य विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह केवल एक सरकारी प्रयास नहीं बल्कि समाज के सामूहिक सहयोग का अभियान है, जिससे हर बच्चे को शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
