औपचारिकताओं की भेंट चढ़ी ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण बैठक - Aaj Tak Media

औपचारिकताओं की भेंट चढ़ी ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण बैठक

 

उरई/जालौन केंद्र व प्रदेश सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजनाओं निपुण भारत एवं समग्र शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु आयोजित ब्लॉक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम विकासखंड रामपुरा में पूरी तरह औपचारिकता की भेंट चढ़ गया। सोनी गेस्ट हाउस, जगम्मनपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में न तो जनप्रतिनिधियों ने रुचि दिखाई और न ही शिक्षा विभाग अपेक्षित सहभागिता सुनिश्चित कर सका।

कार्यक्रम में विकासखंड की 44 ग्राम पंचायतों के प्रधानों तथा सभी प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की उपस्थिति अनिवार्य थी, किंतु वास्तविकता यह रही कि 44 ग्राम पंचायतों में से मात्र 9 प्रधान अथवा उनके प्रतिनिधि ही पहुंचे। इससे स्पष्ट हो गया कि जमीनी स्तर पर शिक्षा योजनाओं को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों व पंचायत प्रतिनिधियों की गंभीरता नगण्य है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र सिंह निरंजन की अनुपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और कम कर दिया। परिणामस्वरूप ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह सेंगर को ही मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि दोनों की भूमिका निभानी पड़ी।

दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के बाद ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह सेंगर, बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्र प्रकाश निषाद, खंड शिक्षा अधिकारी मुक्तेश कुमार गुप्ता तथा प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष धर्मेंद्र चतुर्वेदी का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह सेंगर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताते हुए शिक्षकों से ईमानदारी से कार्य करने का आह्वान किया तथा विद्यालयों को पंचायत स्तर पर सहयोग देने का आश्वासन दिया। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्र प्रकाश निषाद ने भी कर्तव्यनिष्ठा और जवाबदेही की बात दोहराई।

हालांकि, सभागार में आधे से भी कम उपस्थिति होने के कारण किसी ठोस विमर्श, कार्ययोजना या समीक्षा की बजाय कार्यक्रम को जल्दबाजी में समेट दिया गया। न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई और न ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधार को लेकर कोई ठोस रणनीति सामने आई।

सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि जिस मंच से निपुण भारत जैसी राष्ट्रीय योजना की दिशा तय होनी थी, वह मंच केवल भाषणों और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गया। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षा सुधार की बातें कागजों और बैठकों तक ही सिमट कर रह गई हैं।

स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि इस तरह के बहुउद्देशीय कार्यक्रम औपचारिकताओं में समझते रहे तो सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों में चलेंगी और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था लगातार पिछड़ती जाएगी।

अंततः यह आयोजन शिक्षा के प्रति सामूहिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण बनकर रह गया, जहां गंभीर मंथन की जगह औपचारिक रस्मअदायगी होती नजर आई।

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