कोंच (जालौन) बसन्त की बयार के बाद पड़ने वाले सनातनी त्यौहार महा शिवरात्रि पर्व के दिन पूरे क्षेत्र में स्थित शिवालयों में दर्शन करने के लिए ऐसा जन सैलाब उमड़ा कि लोगों को लाइन में लगने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन शिव व माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था इसी कारण शिव भक्त शिवरात्रि पर्व पर भोले नाथ की बिधि बिधान पूर्वक पूजन अर्चन कर ब्रत धारण करते हैं क्योंकि धर्म शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि ब्रत करने वाले साधकों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और साधक के सभी दुखों पीड़ाओं का अंत होते हुए समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं मान्यता है कि इस ब्रत को कुंआरी कन्याएं अपनी योग्य इचछा वर प्राप्ति के लिए ब्रत रखते हुए शिव की पूजा करती हैं और उन्हें आकर्षित करने के लिए वेलपत्र धतूरा वेरफल व दुग्ध आदि समर्पित करतीं है इसी आकांक्षा के चलते नगर क्षेत्र के भूतेश्वर मन्दिर महाकालेश्वर सिध्देश्वर मार्कण्डेश्वर रामकुंड बख्शेश्वर पिपलेश्वर झलेश्वर और पठेश्वर आदि शिवालयों में ब्रह्म महूर्त से ही भगवान शिवजी का अभिषेक करते हुए भक्तों द्वारा पूजन अर्चन प्रारम्भ हुआ और जो देर रात्रि तक अनवरत रूप से चलायमान रहा जिसमें श्रद्धालुओं की अनन्य भक्ति भवनाएं हर हर महादेव के उदघोष में देखने को मिल रही थी ऐसा लगता था कि मानो सम्पूर्ण नगर क्षेत्र शिवमय हो गया हो वहीं भक्तों द्वारा अपने आराध्य के प्रसाद के रूप में बिशाल भंडारों का भी आयोजन किया गया।
