40 डिग्री की आग में अंतिम संस्कार, बुजुर्ग गिरे बेहाल - Aaj Tak Media

40 डिग्री की आग में अंतिम संस्कार, बुजुर्ग गिरे बेहाल

 

अमित गुप्ता

कदौरा (जालौन)

 

कदौरा/जालौन विकासखंड कदौरा के ग्राम महमूद नगर डाले का पुरवा स्थित श्मशान घाट अब अंतिम संस्कार का स्थल नहीं, बल्कि ‘यातना स्थल’ बन चुका है। यहां की बदहाल व्यवस्थाओं ने प्रशासनिक दावों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। रविवार को ग्राम निवासी मिश्रीलाल शर्मा के अंतिम संस्कार के दौरान हालात इतने भयावह हो गए कि 40 डिग्री की भीषण गर्मी में कई बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सवाल यह है कि क्या इंसान को अंतिम विदाई भी अब जोखिम उठाकर देनी पड़ेगी?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच लोग घंटों खड़े रहने को मजबूर रहे। श्मशान घाट पर न टीनशेड है, न पीने के पानी की कोई व्यवस्था और न ही बैठने के लिए छांव या प्लेटफॉर्म। हालात इतने खराब हैं कि अंतिम संस्कार में शामिल लोग खुद बीमार पड़ने लगे। कई बुजुर्गों को चक्कर आने लगे, जिन्हें आनन-फानन में पेड़ों के नीचे बैठाकर संभाला गया। यह दृश्य किसी आपदा से कम नहीं था।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी श्मशान स्थल पर मधुमक्खियों के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। उस समय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन वे वादे कागजों में ही दफन होकर रह गए। न साफ-सफाई हुई, न कोई स्थायी व्यवस्था बनाई गई। नतीजा यह है कि श्मशान घाट आज भी बदहाली की चरम सीमा पर है और यहां आने वाला हर व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर है।

गांव के चंद्रशेखर सिंह परिहार, राजू परिहार, जसवंत सिंह परिहार, रामदास गुप्ता, राजा सिंह, अवधेश गुप्ता, गोई गुप्ता, देवी चरण गुप्ता, गोरी शंकर, नाथूराम शर्मा, राम बहादुर शर्मा, रामकुमार शर्मा, वीर बाबू गौतम, अशोक सिंह परिहार, शरद शर्मा, सिंकू, देव नारायण सेन और संत सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने इस लापरवाही पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि जब सरकार हर गांव में विकास के दावे कर रही है, तब श्मशान घाट जैसी बुनियादी जगह पर भी सुविधाएं न होना शर्मनाक है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टीनशेड, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? अगर किसी दिन गर्मी या अव्यवस्था के कारण किसी बुजुर्ग की जान चली गई, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी और कब मिलेगा ग्रामीणों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार का अधिकार?

Leave a Reply