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ग्राम सिमरिया में डकैतों का आतंक ,दंपति को बंधक बनाकर की लूट

कोंच (जालौन) कोतवाली अंतर्गत ग्राम सिमिरिया में बीती रात हथियारों से लेश 4 नकाबपोश बदमाशों ने रेलवे के अवकाश प्राप्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के घर में घुस कर कर्मचारी और उसकी पत्नी को दो घण्टे तक बंधक बनाए रखा इस दौरान बदमाशो ने महिला के सारे जेवर उतारे और घर में रखी दो लाख रुपये तक की नगदी लूट कर वहां से भाग गए।

ग्राम सिमिरिया निबासी 72 वर्षीय रेलवे के अवकाश प्राप्त कर्मचारी रघवीर अहिरवार उर्फ बाबा शुक्रवार की रात रोजाने की तरह 1 बजकर 15 मिनट पर घर का दरवाजा खोलकर बाहर सड़क के किनारे बनी नाली पर लघुशंका करने के लिए निकले थे लेकिन वहां पहले से 3 से 4 नकाबपोश हथियार बन्द बदमाश घात लगाए हुए दरवाजा खुलने का इंतजार कर रहे थे जैसे ही दरवाजा खुला सभी बदमाशों ने बृद्ध को दबोच लिया और मुह बन्द कर घसीटते हुए घर के अंदर ले गए बृद्ध के हाथ पैर बांध कर मुह में कपड़ा ठूंसा और घर का दरवाजा अंदर से बन्द कर लिया बदमाशों ने घर के अंदर कमरे में खाट पर सो रही बृद्ध की पत्नी 68 वर्षीय श्याम कुँवर उर्फ सिमकरा को खाट से पटक कर मुह ढककर हाथ पैर बांध दिए फिर बदमाशों ने तमंचा निकालकर बृद्ध दम्पत्ति की कनपटी पर सटा दिया घर में कितनी नगदी कितना जेवर है इसकी जानकारी करने लगे बदमाशो ने महिला के नाक की कील और कान के बाले और पैरों की पायले भी उतार ली डरे सहमे दम्पत्ति को घर मे रखे बक्से के अंदर रखी नगदी के बारे में बताना पड़ा बदमाशों ने बक्सा खोला और दो लाख रुपये की नगदी निकालकर वहां से भाग गए बदमाशों के जाने के बाद सुबह 5 बजे तक दम्पत्ति अपने हाथ पैरों में बंधी रस्सी को खोलने की कोशिश करते रहे आखिर में महिला ने अपनी रस्सी खोली और फिर अपने पति को मुक्त कराया डरा सहमा और मदद के लिए चीखा बृद्ध के पड़ोस में रह रहा उनका छोटा भाई राम बिहारी वहां पहुचा और घटनां कि सूचना दी सीओ परमेश्वर प्रसाद ने बताया कि घटनां स्थल का निरीक्षण किया गया है फॉरेंसिक टीम घटनां स्थल से साक्ष्य संकलित किये है मुकदमा दर्ज कर लिया गया है जांच की जा रही है जल्द ही घटनां का राजफाश कर दिया जाएगा

कोंच-ग्राम सिमिरिया निबासी रघुवीर अहिरवार उर्फ बाबा 12 वर्ष पूर्व रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से उरई से रिटायर्ड हुए थे उसके बाद उन्होंने बांकी जिंदगी अपने गाँव सिमिरिया में रहने का फैंसला किया था उनके दो पुत्र है बड़ा पुत्र राज बहादुर अपने परिवार सहित गुजरात बस गया था और पुत्र दुर्गाप्रसाद उरई में अपने परिवार के साथ रहकर मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार का भरण पोषण कर रहा है बृद्ध और उसकी पत्नी गांव के मकान में रह रहे है।

 

पैसो से मंदिर का निर्माण कराना चाह रहे थे दम्पत्ति

बुजुर्ग रघुबीर और उसकी पत्नी पेंशन से गुजर बसर कर रहे है उनके दोनो बच्चे भी सुखी है इसलिए अब बुजुर्ग और उसकी पत्नी की आखिरी इच्छा घर में शंकर जी के मंदिर का निर्माण करने की थी उसने अपने घर से 200 मीटर दूर एक निजी प्लाट पर निर्माण शुरू भी कर दिया था मंदिर निर्माण के लिए वह पैसों को जोड़ रहा था मंदिर में पूजा पाठ करने की उसकी इतनी लाल सा थी कि उसने बाबा बनकर गेरुआ बस्त्र भी धारण कर लिए थे घर के खर्चे भी सीमत कर लिए थे बृद्ध के अनुसार उसके पास संदूक में करीब 2 लाख रुपये जुड़ चुके थे जिनमें रुपयों के साथ सिक्के भी थे लेकिन बदमाश उसकी सभी नगदी समेट कर ले गए जिससे दम्पत्ति बहुत उदास है।

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