जिला संवाददाता अमित गुप्ता
कालपी, जालौन
कालपी/ जालौन नदियों से बालू-मौरम खनन पर तीन माह से लगी रोक अब समाप्त होने जा रही है। शासन की नीति के तहत एक जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में खनन पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में एक अक्टूबर से खनन कार्य शुरू होने के बाद कालपी तथा अन्य क्षेत्रों की मौरम मंडी, निर्माण सामग्री के कारोबार तथा मोटर मार्केट में फिर से गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
वेतवा और यमुना नदी के खदानों से निकलने वाली बालू-मौरम कानपुर देहात, उन्नाव, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी, औरैया, इटावा, मैनपुरी, आगरा, हाथरस, कन्नौज व फर्रुखाबाद सहित विभिन्न जिलों में डंपरों और ट्रकों के माध्यम से पहुंचती है। खनन बंद रहने के कारण इस कारोबार से जुड़े सैकड़ों वाहन पिछले तीन माह से प्रभावित रहे। बालू ढुलाई बंद होने का असर जोल्हूपुर मोड़, कदौरा, कालपी तथा आसपास के मोटर मार्केट पर भी पड़ा। वाहन मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स, टायर, डीजल बिक्री और अन्य कारोबार में गिरावट आने से बाजार की रौनक कम रही। निर्माण कार्यों की रफ्तार भी प्रभावित हुई।
हालांकि, खनन बंद रहने का एक सकारात्मक असर यातायात व्यवस्था पर देखने को मिला। भारी वाहनों की आवाजाही कम होने से कालपी के यमुना पुल और आसपास लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिली।
अब एक अक्टूबर से खनन शुरू होने के साथ भारी वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में कारोबारियों को जहां व्यापार में तेजी आने की उम्मीद है। बालू खनन परियोजना के पट्टे धारक तथा संचालक अपने अपने घाटों तक रास्ता तैयार करने की योजना बनाने लगे हैं।
