जमानतगीर न होने पर कैदी नहीं होंगे रिहा: जेल निरीक्षण के दौरान न्यायिक सचिव ने मांगी सूची, सरकारी खर्चे पर मिलेगी विधिक सहायता - Aaj Tak Media

जमानतगीर न होने पर कैदी नहीं होंगे रिहा: जेल निरीक्षण के दौरान न्यायिक सचिव ने मांगी सूची, सरकारी खर्चे पर मिलेगी विधिक सहायता

उरई, 19 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, अपर जिला जज/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती पारुल पँवार ने आज जिला कारागार उरई का साप्ताहिक निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न बैरकों का भ्रमण करते हुए बंदियों से पूछताछ की, उनकी समस्याओं को समझा और जेल प्रशासन को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।

🤝 आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों के लिए पहल

सचिव/अपर जिला जज श्रीमती पारुल पँवार ने विशेष रूप से उन बंदियों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिनकी जमानत सक्षम न्यायालय से हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर (Surety) न होने के कारण वे रिहा नहीं हो पा रहे हैं।

  • निर्देश: उन्होंने जेल प्रशासन को ऐसे बंदियों की सूची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में भेजने का निर्देश दिया, ताकि प्रभावी पैरवी कर उन्हें शीघ्रता से रिहा कराया जा सके।

  • सरकारी सहायता: जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, उनकी जमानत राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति के माध्यम से करवाए जाने का प्रयास किया जाएगा।

🩺 चिकित्सा, खानपान और विधिक सहायता की समीक्षा

सचिव ने जेल चिकित्सालय का निरीक्षण कर चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल बर्मन से बंदियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसके अतिरिक्त उन्होंने:

  • महिला बंदी: महिला बंदी और उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, खान-पान एवं बुनियादी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

  • मुकदमों की पैरवी: बंदियों के मुकदमों की पैरवी और दी जाने वाली विधिक सहायता/सलाह को परखा।

  • बाल कारागार: बाल कारागार में निरुद्ध बंदियों से अलग से जानकारी ली।

📚 सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता और जेल अपील

जेल प्रशासन को निर्देश दिए गए कि यदि किसी विचाराधीन बंदी का निजी अधिवक्ता न हो, तो उसे विधिक सहायता दिलाए जाने हेतु कार्यवाही सुनिश्चित करें।

  • न्यायमित्र (Amicus Curiae): यदि किसी बंदी को पैरवी के लिए सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता की आवश्यकता हो, तो संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिलवाया जाए, ताकि ‘न्यायमित्र’ की सुविधा उपलब्ध हो सके।

  • जेल अपील: जिन बंदियों की दोषसिद्धि हो चुकी है और वे अपील नहीं कर पाए हैं, उनकी जेल अपील नियमानुसार कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अपील की मियाद समाप्त न होने पाए।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री नीरज देव, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उपकारापाल श्री अमर सिंह सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।

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