ट्रूनैट से समय पर इलाज, टीबी संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने में मिल रही मदद - Aaj Tak Media

ट्रूनैट से समय पर इलाज, टीबी संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने में मिल रही मदद

 

रायबरेली, 20 जनवरी 2026 क्षय रोग (टीबी) की पहचान अब पारंपरिक जांच विधियों तक सीमित नहीं रही है। ट्रूनैट जैसी आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच तकनीक से टीबी की तेज़ और सटीक पहचान संभव हो रही है, जिससे मरीजों का उपचार समय पर शुरू हो पा रहा है और संक्रमण के प्रसार को रोकने में प्रभावी मदद मिल रही है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज द्वारा किए गए एक शोध अध्ययन में यह सामने आया है कि ट्रूनैट जांच, पारंपरिक स्मियर माइक्रोस्कोपी की तुलना में तीन गुना से अधिक टीबी मामलों की पहचान करने में सक्षम है। यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मायकोबैक्टेरियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है, जिसमें 4,249 नमूनों का विश्लेषण किया गया।

उन्होंने बताया कि जनपद की 19 टीबी यूनिटों में 13 नाट मशीनें स्थापित हैं, जिनमें 11 ट्रूनैट और 2 सीबीनाट मशीनें शामिल हैं। इनके माध्यम से प्रतिमाह औसतन 3,549 जांचें की जा रही हैं। समय पर जांच के कारण मरीजों का इलाज बिना विलंब शुरू हो रहा है, जिससे बीमारी के फैलाव पर नियंत्रण संभव हो रहा है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि स्मियर माइक्रोस्कोपी अपेक्षाकृत कम संवेदनशील तकनीक है, जिसमें शुरुआती या हल्के टीबी मामलों की पहचान कठिन होती है। इसके विपरीत ट्रूनैट तकनीक से कुछ ही घंटों में जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है, जिससे टीबी की पुष्टि के साथ-साथ दवा की प्रभावशीलता (रिफैम्पिसिन रेजिस्टेंस) की जानकारी भी मिल जाती है और उपचार की सही रणनीति तय की जा सकती है।

जतुआ टप्पा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लैब टेक्नीशियन अंकुर पटेल ने बताया कि ट्रूनैट एक चिप आधारित तकनीक है, जो कम मात्रा में बैक्टीरिया होने पर भी टीबी संक्रमण की पहचान कर लेती है। यह तकनीक ड्रग रेजिस्टेंट टीबी की समय रहते पहचान में भी सहायक है। ट्रूनैट पोर्टेबल होने के कारण फील्ड स्तर पर उपयोगी है और इसमें मानवीय त्रुटि की संभावना भी कम रहती है। यह बच्चों और एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए विशेष रूप से प्रभावी सिद्ध हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच जनपद में 7,952 टीबी मरीज नोटिफाई किए गए, जिनमें से 6,390 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि शेष मरीजों का इलाज वर्तमान में जारी है।

जनपद में एम्स सहित 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों—डीह, नजीराबाद, ऊंचाहार, डलमऊ, महाराजगंज, बछरावां, सलोन, दीनशाह गौरा, जतुआ टप्पा और खीरों में ट्रूनैट मशीनें स्थापित हैं। वहीं जिला क्षय रोग केंद्र और लालगंज सीएचसी पर सीबीनाट मशीनें कार्यरत हैं। अन्य केंद्रों से सैंपल जांच के लिए इन्हीं स्थानों पर भेजे जाते हैं।

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