जिला संवाददाता अमित गुप्ता
कालपी (जालौन)
कालपी /जालौन यमुना एवं बेतवा नदियों में संभावित बाढ़ तथा वर्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। एसडीएम विनय कुमार मौर्य ने बताया कि तटवर्ती क्षेत्रों में राहत एवं बचाव के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और संम्बंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मालूम हो कि बीते कई वर्षों से यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने पर कालपी तहसील के लगभग दो दर्जन गांव तथा नगर के छह मोहल्ले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। कालपी में यमुना नदी का खतरे का निशान 108 मीटर निर्धारित है। वर्ष 2025 में 2 अगस्त को आई बाढ़ के दौरान जलस्तर करीब 113 मीटर तक पहुंच गया था, जिससे कई गांवों के साथ नगर के आधा दर्जन मोहल्ले जलमग्न हो गए थे। इसी प्रकार बेतवा नदी में आई भीषण बाढ़ से भी कई गांव प्रभावित हुए थे।
एसडीएम विनय कुमार मौर्य ने बताया कि यमुना नदी के तटवर्ती सात अलग अलग गांवों में बाढ़ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त बेतवा नदी के किनारे स्थित गांवों के लिए दो स्थानों पर बाढ़ राहत चौकियों की व्यवस्था की गई है। राजस्व विभाग के अधिकारियों, क्षेत्रीय लेखपालों, कोटेदारों, स्वास्थ्य विभाग की टीमों तथा अन्य संम्बंधित कर्मचारियों को बाढ़ की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। केंद्रीय जल आयोग, कालपी केंद्र के प्रभारी के अनुसार स्थानीय वर्षा का यमुना नदी के जलस्तर पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है। राजस्थान के कोटा बैराज सहित ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के बाद कालपी क्षेत्र में यमुना का जलस्तर बढ़ता है। इसे देखते हुए प्रशासन जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
फोटो – यमुना नदी व उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य
