कालपी /जालौन यमुना नदी के कालपी में स्थापित पुलों के दोनों साइडों में लोहे के बैरिकेडिंग (जाल) स्थापित कराने की मांग को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के द्वारा दरकिनार कर दिया गया है। योजना के अटक जाने से दुर्घटनाओं की सम्भावना बढ़ती जा रही हैं।
विदित हो कि उत्तर एवं दक्षिण भारत को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग रोड में यमुना नदी कालपी में दो पुल बने हुए हैं। पहला पुल सन 1982 में बना, जबकि दूसरा पुल 2020 में बना था। दोनों पुलों के दोनों साइड में चार-चार फिट ऊंचाई की रेलिंग लगी हुई है। दरअसल दोनों पुल कालपी नगर की आबादी से सटे हुए हैं। इसलिए सुबह – शाम कई लोग मॉर्निंग वॉक में टहलने के लिए जाते हैं। बताया गया कि रेलिंग की ऊंचाई कम होने की वजह से मानसिक उलझनों से त्रस्त लोग पुल की रेलिंग फांदकर यमुना में छलांग लगाकर अपने जीवन लीला समाप्त करने का प्रयास करते हैं। एक वर्ष के अंदर कथित तौर पर तमाम लोग यमुना नदी के पुल के ऊपर से बहती दरिया में छलांग लगा चुके हैं। इस तरह की तमाम घटनाएं हो चुकी है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए विधायक विनोद चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों तथा जिला प्रशासन से यमुना पुल के दोनों साइडों में रेलिंग के ऊपर बैरिकेडिंग लगाने का पत्र लिखा था। बताते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों द्वारा यह कहते हुए इंकार कर दिया कि हमारे यहां इस प्रकार का कोई प्रोसिस नहीं है। तथा टालमटोल नीति अपनाई जा रही है। विधायक विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि वैरिकेटिंग लगाने के लिए पुनः प्रयास तेज किए जाएंगे। इस सम्बन्ध में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी से भेंट करके सारी स्थितियों से अवगत करा कर यमुना नदी पुलों के दोनों साइडों में बैरीकेटिंग लगाने की मांग उठाई जायेगी।
फोटो – यमुना नदी का कालपी में पुल
