प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में सरकार ने किया संशोधन

Nov 18, 2023 - 19:06
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में सरकार ने किया संशोधन

-दूसरा बच्चा बेटी होने पर मिलेगी छह हजार रुपए की एकमुश्त धनराशि 

-तीन किस्तों में मिलने वाले पांच हजार रुपए अब दो किस्तों में मिलेंगे

उन्नाव, 18 नवंबर 2023 गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना(पीएमएमवीवाई) में कुछ संशोधन कर पीएमएमवीवाई 2.0 के रूप में इसे लागू कर दिया गया है |यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सत्यप्रकाश ने दी | उन्होंने योजना में बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि पीएमएमवीवाई 2.0 में अब तीन किस्तों में मिलने वाले पांच हजार रुपए दो किस्तों में मिलेंगे। पीएमएमवीवाई में पहले लाभार्थी को तीन किस्तों में पांच हजार रुपये दिये जाते थे। पहले प्रथम किस्त के रूप में 1000 रुपये, दूसरी किस्त के रूप में (गर्भावस्था के छह माह बाद) 2000 रुपये और बच्चे के जन्म का पंजीकरण होने और बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर तीसरी किस्त के रूप में 2000 रुपये दिए जाते थे। अब यह धनराशि दो किस्तों में मिलेगी। प्रथम किस्त (तीन हजार रुपये) प्रसव पूर्व कम से कम एक जांच होने पर और दूसरी किस्त (दो हजार रुपये) बच्चे के जन्म का पंजीकरण होने, बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर मिलेगी।  

इसके साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब लाभार्थी की अंतिम माहवारी आने की तिथि से 570 दिन तक या बच्चे के जन्म लेने के 270 दिन तक पंजीकरण कर सकेंगे। 

इसके अलावा दूसरी बार गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला को दूसरा शिशु बालिका होने पर 6000 रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा | इसके लिए लाभार्थी को बच्चे का टीकाकरण कार्ड सहित अन्य सभी पहचान पत्र जो ऊपर दिए गए हैं उसके सत्यापन के बाद ही 6000 रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा | इसके साथ ही बच्चे का जन्म एक अप्रैल 2022 या उसके बाद हुआ हो | सरकारी कर्मचारी इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे |

पीएमएमवीवाई के नोडल अधिकारी डा. हरिनन्दन प्रसाद ने जानकारी दी कि प्रसव चाहे सरकारी स्वास्थ्य संस्थान अथवा निजी संस्थान में हुआ हो दोनों ही प्रकार के लाभार्थी योजना के पात्र है।

 इसके साथ ही योजना का लाभ पाने के लिए पिता के आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी गयी है। योजना में पहले पिता का आधार कार्ड होना अनिवार्य था, अब यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। उन्होंने कहा इससे अब उन महिलाओं को भी लाभ मिल सकेगा जो तलाकशुदा और सिंगल मदर हैं। केवल मां के आधार कार्ड पर योजना का लाभ मिल सकेगा |योजना को अब पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है |

इस योजना का लाभ लेने हेतु क्षेत्रीय आशा या एएनएम् से सम्पर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर-104 पर योजना से सम्बन्धित जानकारी ली जा सकती है।

योजना के जिला कार्यक्रम समन्वयक अवश शुक्ला ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज हैं - माँ का आधार कार्ड , एमसीपी कार्ड, प्रसवपूर्व जांच की तारीख, आदि | इसके अलावा आठ लाख से कम आय की स्थिति में आय प्रमाण पत्र या बीपीएल राशन कार्ड या ई-श्रम कार्ड या आयुष्मान कार्ड या मनरेगा कार्ड आवश्यक होगा | महिला किसान की स्थिति में लाभार्थी को किसान सम्मान निधि का लाभार्थी होना जरूरी है | यदि लाभार्थी दिव्यांग है तो 40 फीसद से अधिक दिव्यांगता की स्थिति में प्रमाण पत्र जरूरी होगा | इसके अलावा यदि लाभार्थी अनुसूचित जाति या जनजाति से है तो उस स्थिति में जाति प्रमाण पत्र जरूरी है | आधार कार्ड का बैंक खाते के साथ लिंक होना आवश्यक है | जिसके बाद लाभार्थी को 3000 रुपये की पहली किस्त और बच्चे के जन्म के बाद दूसरा फॉर्म भरने पर 2000 रुपये मिलेगा | गर्भवती और धात्री आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिका भी इस योजना का लाभ उठा पायेंगी |

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