यूं ही नहीं कोई फाइलेरिया योद्धा बन जाता है

Feb 22, 2024 - 18:46
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यूं ही नहीं कोई फाइलेरिया योद्धा बन जाता है

लखनऊ, 22 फरवरी 2024। मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर। लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।' यह शेर मोहनलालगंज ब्लॉक के बिंदौआ गांव के फाइलेरिया मरीज 63 वर्षीय राम कुमार द्विवेदी पर बिल्कुल सटीक बैठता है। राम कुमार साल 2019 में होमगार्ड की नौकरी से सेवानिवृत हुए। तीन माह पहले वह दुर्गामाता फाइलेरिया समूह से जुड़े और लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूक करना शुरू किया। वह बताते हैं कि पहले तो वह जब समूह से जुड़े तो लोगों ने कहा कि इससे क्या लाभ होगा लेकिन मुझे फाइलेरिया की गंभीरता का एहसास था। मेरे बाद समूह में धीरे-धीरे कर 10 लोग और जुड़ गए। 

राम कुमार बताते हैं कि लगभग 20 साल से फाइलेरिया से पीड़ित हैं और उनका बायां पैर प्रभावित है। तमाम इलाज के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ। जब दवा खाते थे तो सूजन कम हो जाती थी लेकिन उसके बाद बढ़ जाती। जब से समूह से जुड़े और व्यायाम व फाइलेरिया ग्रसित पैर की देखभाल के तरीके सीखे। व्यायाम से सूजन नहीं बढ़ी है। समूह से जुड़कर ही यह जानकारी मिली की फाइलेरिया से बचाव का सबसे अच्छा तरीका फाइलेरियारोधी दवा का सेवन है। इसके बाद मैनें लोगों को जागरूक करना शुरू किया। 

कई बार लोग दवा खाने से इंकार करते हैं, लोग कहते हैं कि मुझे फाइलेरिया नहीं है तो मैं दवा क्यों खाऊं या फिर दवा को लेकर तरह-तरह की बातें करते हैं, ऐसे में मैं लोगों को बताता हूं कि फाइलेरियारोधी दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं और फाइलेरिया से बचने का सबसे अच्छा तरीका इन दवाओं का सेवन है। इस दौरान मैं लोगों को अपना पैर दिखाता हूं और अपनी कहानी भी बताता हूं, जिसके बाद लोग दवा खाने के लिए राजी हो जाते हैं। 

जिला मलेरिया अधिकारी डा. रितु बताती हैं कि यह फाइलेरिया नेटवर्क जनपद के पांच ब्लॉक सरोजिनी नगर, मोहनलालगंज, माल, बक्शी का तालाब और काकोरी में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आमजन को फाइलेरिया से बचाने के लिए बीती 10 फरवरी से सामूहिक दवा सेवन (आईडीए) अभियान शुरू किया गया है, जिसका समापन 28 फरवरी को होगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों को इस बीमारी से बचाने की दवा खिला रहीं हैं। इस अभियान के दौरान राम कुमार द्विवेदी कई बार स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ जाकर दवा खिलाने में विभाग का सहयोग करते हैं। अब तक उन्होंने दवा खाने से इंकार करने वाले 226 लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिला चुके हैं।

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