भ्रष्टाचारी सचिव और प्रधान को संरक्षण देकर बचा रहे डीपीआरओ

ज़िला संवाददाता
अमित गुप्ता
कालपी जालौन
कालपी/जालौन सरकारी महकमें में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी जमी हुई है इसीलिए सरकारी धन की लूट खसोट लगातार जारी है। इस लूट में सरकारी तंत्र इस तरह से डूबा हुआ है कि भ्रष्टाचारी घोषित हो चुके ग्राम प्रधान एवं सचिव को बचाने में ब्लॉक से लेकर जिला स्तर के अधिकारी एड़ी चोटी का जोर लगाए है।
*भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करते ग्राम प्रधान एवं सचिव* कालपी तहसील क्षेत्र के ग्राम मंगरौल मुस्तकिल निवासी सुनील कुमार, ताराचंद, अमित कुमार, धीरेंद्र, अरुण कुमार आदि आठ ग्राम पंचायत सदस्यों ने 26 जुलाई 2023 को शपथ पत्रों में शिकायती पत्र जिला अधिकारी कार्यालय उरई में दिया था। इस शिकायती पत्र में ग्राम पंचायत सदस्यों के द्वारा ग्राम प्रधान एवं सचिव पर मासिक एवं सोशल ऑडिट की बैठकों की सूचना नहीं देने, ग्राम में अरविंद मिश्रा के घर से राजेंद्र सिंह के घर तक सीसी निर्माण में मानकों का उल्लंघन, कमीशन खोरी के चलते आवासों का अपूर्ण निर्माण, ग्राम के विभिन्न स्थानों पर हैंडपंप की मरम्मत ग्रामीणों द्वारा सामूहिक चंदे से करना, नवनिर्मित शौचालय निर्माण में भारी भ्रष्टाचार से अल्प समय में निष्प्रयोज्य हो जाना, सफाई कर्मचारियों का बिना सफाई कार्य किए भुगतान होना, ग्राम की निराश्रित महिला के नवनिर्मित कैटल शेड के भुगतान की एमबी शून्य करना, रेन वाटर हार्वेस्टिंग का रुपए 21828 और 14280 अपने होमगार्ड पुत्र के खाते में अवैध भुगतान आदि आरोप लगाकर जांच करने की मांग की थी।
*ग्राम प्रधान और सचिव पर सत्य सिद्ध हुए आरोप*
जिलाधिकारी ने उक्त प्रकरण का संज्ञान लेते हुए 12 अक्टूबर 2023 को दो सदस्य जांच कमेटी का गठन किया। जिसमें जिला उद्यान अधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को जांच अधिकारी नामित किया गया। पूरे 1 साल बीत जाने के पश्चात जांच अधिकारी जांच करने ग्राम मंगरौल पहुंचे तो ग्राम प्रधान एवं सचिव पर लगाए सभी आरोप सत्य सिद्ध हुए। बिंदुवार जांच करते हुए जिला उद्यान अधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने जांच आख्या में अवगत कराया कि पूर्व सूचना देने के बाद भी कार्यवाही रजिस्टर सचिव ने प्रस्तुत नहीं किया। सीसी निर्माण में सतह असंतोषजनक पाई गई इसलिए रुपए 6760.3 की कटौती की जाए। रमेश का आवास अपूर्ण पाया गया। हैंडपंप रिपेयरिंग में ₹2300 की रिकवरी तय हुई। सामुदायिक शौचालय में पानी की अनुपलब्धता है जबकि सचिव को पत्र संख्या 580 दिनांक 19 जुलाई 2024 को निर्देशित किया जा चुका है। सफाई कर्मचारियों को सहायक विकास अधिकारी द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। निराश्रित महिला की कैटल शेड के भुगतान के लिए सचिव को निर्देश दिया जा चुका है लेकिन भुगतान नहीं हुआ है। प्रधान द्वारा अपने होमगार्ड में कार्यरत पुत्र के खाते में अवैध रूप से डाले गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की 21828 तथा 14280 रुपए की धनराशि की रिकवरी ग्राम प्रधान एवं सचिव पर रोपित की गई है।
*भ्रष्टाचारी सचिव एवं ग्राम प्रधान पर डीपीआरओ नहीं कर रहा कार्यवाही* उक्त प्रकरण में डीपीआरओ की भूमिका संदेहास्पद होती जा रही है। जांच को चार माह बीत जाने के पश्चात दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि शिकायतकर्ता दर्जनों बार उक्त अधिकारी के कार्यालय में चक्कर काट चुके है। कभी कारण बताओं नोटिस भेजने, कभी प्राप्ति रसीदें जमा करवाने की बात कहकर शिकायतकर्ताओं को निराश भेज दिया जाता है। अहम दृष्टिकोण यह है कि ग्राम प्रधान सचिव और पूर्व सचिव को कारण बताओ नोटिस क्रमशः 10 सितंबर 2024 एवं 6 सितंबर 2024 को जारी करके 20 दिनों की समय अवधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किया गया था। परंतु निर्धारित समय अवधि पूर्ण होने के एक माह बीत जाने पर भी कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है।
*जांच के बाद गांव की स्थिति हुई और अधिक बदतर*
जांच होने के बाद उपरोक्त वर्णित बिंदुओं के विषयों पर कोई बदलाव नहीं हुआ है बल्कि समस्या और बढ़ गई है। प्रधान द्वारा बैठकों में सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर से प्रस्ताव पारित हो रहे हैं जबकि सदस्यों को कार्रवाई रजिस्टर के दर्शन दुर्लभ है। शौचालय अभी भी निष्प्रयोज्य है। ग्रामीणों द्वारा हैंडपंप रिपेयरिंग सामूहिक चंदे से हो रही है। निराश्रित महिला के निर्मित कैटल शेड का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। सीसी की स्थिति और भी बदतर हो गई है। सफाई कर्मियों द्वारा सफाई करना करने से पंचायत घर के रास्ते से निकलना मुश्किल हो रहा है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि द्वारा सजातीय मजदूर के घर के पास से सोलर लाइट जबरन उखाड़ दी जाती है और विरोध करने पर सरेआम गाली गलौज की जाती है। प्रधान के द्वारा गाटा संख्या 508 में स्थित युवक मंगल दल की जमीन पर खाद के पक्के गड्ढों का निर्माण करके अवैध कब्जा किया जा रहा है।
अब यक्ष प्रश्न यह हैं कि ग्रामीणजन मतदान करके गांव और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की चाह रखते हैं। जनप्रतिनिधि के भ्रष्टाचारी होने पर उनके सपनों पर कुठाराघात हो जाता है। जनप्रतिनिधि के भ्रष्टाचार की शिकायत जिलास्तरीय अधिकारियों से इस उद्देश्य से करता है कि दोषी जनप्रतिनिधियों पर कार्यवाही होगी तो अन्य भ्रष्टाचारी जनप्रतिनिधियों में कार्यवाही का डर व्याप्त हो जाएगा इसीलिए ग्राम प्रधान एवं सचिव के भ्रष्टाचार की जानकारी साक्ष्यों सहित जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करके कार्यवाही की आशा रखता है। परंतु जिला स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी डेढ़ से 2 साल कार्रवाई में निकल रहे हैं भ्रष्टाचार घोषित होने के पश्चात चार माह तक दंडात्मक गतिविधि ना होना डीपीआरओ की कार्य प्रणाली को संदेह के घेरे में दृष्टिगोचर करता है और ग्रामीणजनों की परेशानियों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचारियों का सहयोगी होना प्रतीत होता है।
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