अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त घर के मुआवजे में बाधक बना लेखपाल

Feb 3, 2024 - 18:33
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अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त घर के मुआवजे में बाधक बना लेखपाल

अमित गुप्ता

कालपी जालौन 

कालपी/ जालौन केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा गरीब हित के लिए लगातार कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य पात्र व्यक्तियों को संचालित योजनाओं से लाभान्वित करना है।     परंतु ग्राम स्तर पर ये योजनाएं अपना प्रभाव छोड़ने में नाकाम सिद्ध हो रही है इसका कारण ग्राम स्तर पर पात्रता का सत्यापन आमतौर पर ग्राम पंचायत सचिव एवं लेखपाल द्वारा होता है। ग्राम पंचायत सचिव एवं लेखपाल द्वारा कृत कार्यवाही ही सत्यापन की प्रक्रिया में पात्र या अपात्र की श्रेणी सुनिश्चित करती है परंतु सत्यापनकर्ता का निजी हित लाभ एवं विचारधारा भी कई मामलों में दृष्टिगोचर हो जाती है। ऐसा ही एक मामला कालपी तहसील अंतर्गत ग्राम मंगरौल से प्रकाश में आया है।

उक्त ग्राम के निवासी हरगोविंद सिंह का घर अक्टूबर माह सन 2022 में अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त हो गया था। पीड़ित द्वारा इसकी सूचना ग्राम के संबंधित लेखपाल को पहुंचा दी थी। काफी अर्सा बीत जाने के बाद भी उक्त प्रकरण में लेखपाल द्वारा कोई प्रभावी कार्यवाही न करने पर प्रार्थी द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय उरई में एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिसकी शिकायत संख्या 2000165 28514 है। इस आवेदन पत्र में प्रार्थी द्वारा स्थलीय निरीक्षण करके सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की गई थी। उक्त आवेदन पत्र में लेखपाल द्वारा स्थलीय निरीक्षण किए बगैर ही फर्जी आख्या लगाकर प्रार्थी के क्षतिग्रस्त घर को गैर आवासीय घोषित कर दिया गया है। जबकि ग्राम वासियों से पता चला कि प्रार्थी का एकमात्र घर है अन्य कोई दूसरा घर नहीं है। ग्राम वासियों के अनुसार प्रार्थी का घर पूर्वजों द्वारा निर्मित घर है एवं पीड़ित के परिवार में सात सदस्य हैं। प्रार्थी के चार कमरों में से दो कच्चे कमरे पूर्णतया निष्प्रयोज्य हैं। दो कमरे चूने और ईंट की दीवारों पर ईंटों की छत से बने थे। वह भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पीड़ित परिवार घास का छप्पर एवं बरसाती डालकर जीवन यापन करने को मजबूर है। पीड़ित द्वारा दिनांक 3 फरवरी को कालपी तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के प्रभारी उप जिला अधिकारी कालपी के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत कर स्थल निरीक्षण किए जाने की मांग की गई है। उप जिलाधिकारी के द्वारा स्थलीय निरीक्षण करके हर संभव मदद का आश्वासन पीड़ित को दिया गया है। उक्त लेखपाल से संबंधित नकारात्मक बातें कई बार क्षेत्र में चर्चा का विषय रही हैं

लेखपाल द्वारा ऐसी घटना से संबंधित दूसरा प्रकरण

इन्हीं में से एक मंगरौल के दूसरे घटनाक्रम में ग्रामीण विवेकानंद के अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त घर के आवेदन पत्र में गलत एवं फर्जी आख्या लगाया जाना भी चर्चा का विषय रहा है। उक्त ग्राम निवासी विवेकानंद के घर का अधिकांश हिस्सा भी अतिवृष्टि से जमींदोज हो गया है। लेखपाल को तमाम बार सूचना दी गई परंतु लेखपाल द्वारा स्थल निरीक्षण ना करते हुए भी पीड़ित के क्षतिग्रस्त घर को अपात्रता की श्रेणी में घोषित कर दिया गया है।

      प्रश्न चिन्ह यह है कि उक्त प्रकरण को दृष्टिगत रखते हुए लेखपाल द्वारा पात्र पीड़ितों को अपात्रता की श्रेणी में उल्लेखित करना एक साधारण चूक है या लेखपाल के निजी हित लाभ एवं विचारधारा की पूर्ति न होने से पीड़ितों को शासन की लाभपरक योजनाओं से वंचित रखने में गर्व महसूस करना।

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