भक्तो ने कृष्ण की बाल लीलाओं के साथ श्री गिर्राज जी की कथा का लिया आनंद

May 10, 2024 - 05:07
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भक्तो ने कृष्ण की बाल लीलाओं के साथ श्री गिर्राज जी की कथा का लिया आनंद

  संवाददाता के के श्रीवास्तव जालौन 

 माधौगढ़ जालौन नवयुवक महाकाल सेवा समिति धमना एवं छोटी माता मंदिर कमेटी माधोगढ़ के तत्वाधान में एवं महंत सुशील महाराज के सानिध्य में ग्राम धमना में चल रही श्री मदभागवत कथा के छटवे दिन की कथा में कथा व्यास राजेंद्र शास्त्री ने कहा कि ईश्वर अपने भक्त को सुख दुःख की अग्नि में तपाकर परीक्षा जरूर लेते है कि ये मेरा सच्चा भक्त है या झूठा जो इस परीक्षा को पूर्ण कर लेता है वो प्राणी संसार सागर से मुक्त होकर हरि चरणों मे रम जाता है। श्री गिर्राज पूजा के माध्यम से ठाकुर जी ने ब्रजवासियों को अपराध मुक्त कराया व इंद्र के प्रकोप से बचाया था हमारे घर साधु,संत,ब्राह्मण आये तो हमे उनका सम्मान करना चाहिए अगर हम सम्मान नही करते है तो अपराध लगता है इसी अपराध से ब्रजवासियों को बचाने के लिये प्रभु ने अपनी पूजा गोवर्धन पर्वत में कराई थी। आज भी कलियुग में ब्रज मंडल में गिर्राज महाराज अपने भक्तो पर कृपा बरसा रहे है।

कथा व्यास ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की हर परस्थिति में रक्षा करते हैं और अहंकार करने वाले का मान तोड़ देते हैं। भगवान की भक्ति में अहंकार की कोई जगह नहीं होती। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोडऩे के लिए ही गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाई। इसके बाद इंद्र के क्रोध से गोपी और ग्वालों को बचाने के लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर भी उठा लिया कथा की शुरुआत में कथाव्यास राजेंद्र शास्त्री ने पूतना वध प्रसंग की कथा सुनाते हुए बताया कि नंद जी के घर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खबर जब कंस को लगी, तो उसने क्षेत्र के सभी नवजात शिशुओं की हत्या करवाने के लिए राक्षसी पूतना को भेजा। माता यशोदा से कृष्ण को लेने के लिए पूतना ने अपने मायाजाल से सुंदर युवती का रूप धारण कर लिया परंतु भगवान पूतना को पहचान गए। पूतना को कृष्ण से कोई स्नेह नहीं था, वह भगवान को मार डालना चाहती थी। फिर भी जाने-अनजाने उसने भगवान कृष्ण को स्तनपान करवाकर परमगति प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने यमलार्जुन मोक्ष के साथ बकासुर, अघासुर आदि राक्षसों के वध का वर्णन किया। ब्रह्ममोह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि एक बार ब्रह्मा जी ने श्रीकृष्ण की परीक्षा लेनी चाही। इसके लिए ब्रह्मा जी ने सभी बछड़ों और ग्वालों को एक वर्ष के लिए छुपा दिया। लेकिन इस बीच भगवान स्वयं उन गायों के बछड़े और ग्वालों के रूप में सभी जगह उपस्थित रहे। तब जाकर ब्रह्मा जी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण के असली स्वरुप को पहचाना। इसके बाद भगवान की सुंदर बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि जब कृष्ण जी ने बृजवासियों को इंद्रदेव की जगह सूर्य भगवान की पूजा करने को कहा, तो अंहकार से भरे हुए इंद्र देव क्रोधित हो गए। अपने अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने बृज में घनघोर वर्षा करवाई। ऐसे में इंद्र के घमंड को चूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की अवस्था में गिरिराज गोवर्धन को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर बृजवासियों की रक्षा की और इंद्र के अहंकार को नष्ट किया। कथा श्रवण करने काफी संख्या में भगवद भक्त पधार रहे पहले दिन से ही कथा पंडाल भक्तों से पूर्ण है इस मौके परपरिक्षत गिरीश सिंह धमना यज्ञपति ब्रजेन्द्र सिंह, यज्ञ व्यवस्थापक राघवेंद्र सिंह प्रधान, राजेंद्र दूरवार, सोनू कुशवाहा, दशरथ सिंह खुदातपुरा, सुखदेव धमना, प्रमोद मिश्रा,अशोक चंचल आदि लोग उपस्थित रहे!

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