उत्तरप्रदेश कदौरा जालौन

हजरत अब्बास अलमदार की शहादत को याद करते हुए उठाये गए अलम

 

कदौरा /जालौन, मोहर्रम का महीना लगते ही मुस्लिम धर्म की नाएबर्ष की शुरुआत भी होती है,इसी क्रम में कस्बे में स्तिथ सज्जन चौक के बड़े इमामबाड़े से बीती रात हजरते अब्बास की शहादत को याद करते हुए अलम का जुलूस निकाला गया जिसमे सैकड़ो की संख्या में अक़ीक़दमंदो ने अब्बास अलमदार,या अली ,य हुसैन के नारे लगाये

क्यो उठते है अलम

वारिस ये सिलसिला वकाइया सैय्यद हस्सान बाकई ने जानकारी देते हुये बताया कि मोहर्रम महीने की आठवीं तारीख पर इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की शहादत को याद किया गया इस दौरान सोगवारों ने अपने इमामबाडो में हजरत अब्बास की याद में अलम सजाए और उन्हें इमामबाड़ा में ले जाकर पेश किए
नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास अलमदार की शहादत मोहर्रम महीने की आठ तारीख को मनाई जाती है। मोहर्रम की यह तारीख हजरत अब्बास के नाम से मंसूब है। हजरत अब्बास के बारे में इतिहास में मिलता है कि वह संपूर्ण रूप से हजरत अली से मिलते थे तथा उसी प्रकार वह भी बहादुर थे। कर्बला में प्रवेश करने के साथ इमाम हुसैन ने अपने कैंप वहां से गुजरने वाली नहर फरात के किनारे लगवाए थे ताकि बच्चों को ठंडी हवा मिलती रहे और तपते हुए रेगस्तिान में पानी की भी कोई परेशानी न हो। लेकिन उस समय के जालिम शासक यजीद द्वारा भेजी गई फौज ने कहा कि इमाम हुसैन से कहो कि दरिया के किनारे से अपने कैंप हटा लें अंत समय में जब हजरत अब्बास ने इमाम हुसैन से अनुमति मांगी तो उन्हें जंग करने की अनुमति नहीं दी बल्कि कहा कि हो सके तो अपनी भतीजी सकीना जो इमामे हुसैन की बेटी थी जिनकी उम्र करीब चार बर्ष थी तो हजरते अब्बास भतीजी व बच्चों के लिए पानी ले आओ हजरत अब्बास मश्क लेकर दरिया की ओर चले तथा उन्होंने दरिया पर कब्जा कर लिया मश्क भरी तथा वापस पलटे लेकिन दुश्मनों ने आप पर हमला कर दिया यहां तक कि आपके दोनों हाथ काट दिए गए और तीन मारकर पूरा पानी गर्म रेत पर गिरा दिया। हजरत अब्बास भी घोड़े पर संभल नहीं पाए, तथा उनकी शहादत हो गई इसीलिए उनको बफात का पैकर कहा जाता है और उन्ही की याद में अलम उठाये जाते है

इस मौके पर कस्बे के सज्जन चौक पर स्तिथ बड़े इमामबाड़े पर अलम सजाए जाते है और इमामबाड़े में मरसिये पड़े जाते है एवं इमामे हुसैन ,मौला अली,व हजरत अब्बास की शहादत को याद किया है

इस दौरान चाँद खान, सगीर खान,जसीम खान,साकिर खान,भूरा खान,शाहरुख खान,राज खान,मैजान खान,आदि मौजूद रहे

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