संपादकीय

 

कोंच (जालौन) यूपी की राजनीति समझने वाले बखूबी जानते है कि वहां कांग्रेस दूर दूर तक जमीन पर कहीं भी नहीं है, मुख्य विपक्षी दल सपा और बसपा है जिनका ग्राउंड पर कैडर है वजूद है।

,इनके बाद कांग्रेस का नम्बर आता है लेकिन मीडिया में माहौल हमेशा भाजपा बनाम कांग्रेस का बना रहता है ।
मीडिया में सपा और बसपा को तुलनात्मक नजरिए से देखा जाए तो जगह बहुत कम मिलती है,, नेशनल मीडिया यह सब क्यों कर रही है !!!
क्योंकि बाबा आदित्यनाथ यही चाहते है।

एक सोची समझी राजनीति के ज़रिए जानबूझ कर योगी आदित्यनाथ यूपी में कांग्रेस को खड़ा कर रहे है, ताकि उसके असली विपक्षियों को ताकत न मिले। और उन्हें भ्रम की स्थिति का फायदा मिल जाए और 2022 में सत्ता की वापसी हो जाये।

न तो प्रियंका गांधी चुनाव लड़ने जाएंगी विधायक का और न राहुल गांधी, यूपी में,, यह सब जानते है।

यदि आज कांग्रेस से पूछा जाए तो उसके पास 400 सीट पर खड़ा करने के लिए उम्मीदवार का नाम तक नही होगा,, और इस कांग्रेस से यूपी में आदित्यनाथ को इतना डर क्यों लग रहा है ??

बहनजी का कोई वजूद नही है ,मुझे तो यहां तक शक है कि हो सकता है उनके ट्विटर अकाउंट का पासवर्ड भी भाजपा के पास हो, भाजपा ख़ुद अपने हिसाब से टवीट कर देती होंगी बहन जी के नाम पर।

कोरोना की इस आपदा में बहन जी का कोई प्रतिनिधि सड़क पर नही दिखा होगा किसी को।

वहां दूसरी तरफ सपा के कई नेता कार्यकर्ता सड़क पर मैदान में मोर्चा लगाए हुए तो है ,कुछ न कुछ काम भी कर रहे है लेकिन अखिलेश यादव अपने घर मे बैठ कर सिर्फ ट्वीट कर रहे है। इस वजह से राष्ट्रीय मीडिया में सपा का कोई नाम नजर नही आता है।

कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़क पर भी है और मीडिया व ट्विटर पर भी, और मजबूत टक्कर दे रहे है बाबा आदित्यनाथ को,, लेकिन ये सब कांग्रेस का वोट % जरूर बढ़ा सकता है लेकिन कांग्रेस को छ्प्पर फाड़ सीट मिल जाये यूपी में यह किसी को उम्मीद नही है।

इसके बावजूद भी योगी आदित्यनाथ कांग्रेस को बहुत वजन जानबूझ कर दे रहे है यूपी की राजनीति में ,राष्ट्रीय मीडिया में,यह रणनीति जाहिर है योगी आदित्यनाथ की स्वयं की है क्योंकि सिर्फ इस प्रकार से ही वो अपनी कुर्सी बचा पाएंगे ।

मीडिया में कांग्रेस विपक्ष के तौर पर बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका होगा लेकिन जमीन पर संगठन नही होगा ,,ऐसे में जाहिर है वोट बिखरेंगे ,कांग्रेस की तरफ जो वोट जाएगा वह सपा और बसपा का ही वोटर होगा।

यदि यह वोट बिखराव आदित्यनाथ के अनुमान मुताबिक हुआ तो वो यकीनन दूसरी बार वापसी कर लेंगे।

कांग्रेस के लिए फिलहाल घाटे का सौदा नही है, क्योंकि उसको खोना कुछ भी नही है यूपी में, वो अपनी जड़ें मजबूत कर रही है और मजबूरी में ही सही बाबा आदित्यनाथ कांग्रेस की जड़ फोकट में मजबूत कर रहे है।

यही वजह है कि बहनजी कांग्रेस से खार खाए बैठी है, उनको आज यूपी में अपना सबसे बड़ा दुश्मन कांग्रेस लग रही है, और वो बजाय भाजपा से लड़ने के कांग्रेस पर ज्यादा हमलावर है।

दूसरी तरफ अखिलेश यादव सिर्फ घर मे बैठे ट्वीट खेल कर अपनी राजनीति खेल रहे है, उनका जमीन पर नही उतरना उनके अपने कैडर का जोश खत्म कर रहा है।

अखिलेश यादव किस्मत से यादव तो है लेकिन लालूप्रसाद यादव जैसे योद्धा नही है, वो हिम्मत नही जुटा पा रहे खुल कर भाजपा से लड़ने की क्योंकि भाजपा से लड़ने का मतलब है सीबीआई इनकम टैक्स ईडी वगैरह से भी लड़ना, जो उन्हें फिलहाल मंजूर नही है।

हालांकि अखिलेश यादव के ट्वीट अच्छे हो रहे है वो भाजपा से लड़ते दिख रहे है लेकिन सिर्फ ट्विटर पर ।।
सपा नेता आजमखान के हुए उत्पीड़न और जेल जाने पर भी अखिलेश के नेतृत्व में पूरी पार्टी मौन है, सिर्फ कुछ ट्वीट कर के अखिलेश यादव ने अपनी जिम्मेदारी निपटा दी,, आजमखान मुस्लिमो के बीच एक चेहरा है।

आजम खान के मामले में चुप्पी जाहिर है सपा का एक बड़ा वोट बैंक मुस्लिम डिस्टर्ब होगा और किसी विकल्प की तरफ जाएगा,, ऐसे में कांग्रेस से बढ़िया विकल्प और क्या हो सकता है उनके पास।

मुस्लिम समुदाय अमूमन उसी को वोट देता है जहां उन्हें यह लगता हो कि ये बीजेपी को रोक सकते है,, योगी आदित्यनाथ यह विकल्प स्वयं मुस्लिमो को कांग्रेस के तौर पर परोस रहे है, उन्हें राष्ट्रीय मीडिया में हाइप दिलवा कर।।

योगी आदित्यनाथ को हर हाल में 2022 में वापसी करनी है ,तभी वो यह सब कर रहे है ताकि वो 2024 में खुद को पीएम का दावेदार कह पाए।

उपरोक्त विचार मेरे निजी है और मेरा अपना विश्लेषण है।

संतोष कुमार निरंजन संपादक आज तक मीडिया

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