उत्तरप्रदेश

कानूनी अनियमितता नहीं रखता नोटरी कराया बैनामा

*कानूनी अहमियत नहीं रखता नोटरी कराया बैनामा-किरायानामा-मुख्तारनामा या इकरारनामा, एआईजी ने लोगों को किया सचेत*

वाराणसी: जमीन के कारोबार से जुड़े प्राय: स्टाम्प बचाने की खातिर पब्लिक नोटरी से प्रमाणिकृत बैनामा/किरायानामा/मुख्तारनामा/इकरारनामा इत्यादि विलेखों से संबंधित पक्ष को संतुष्ट कर देते हैं। वास्तविकता यह है कि इससे अचल संपत्ति में कोई वैधानिक स्वत्व सृजित नहीं होता। सहायक महानिरीक्षक निबंधन सुरेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ऐसी दस्तावेज या प्रपत्र, जिन पर भारतीय स्टांप अधिनियम के अंतर्गत स्टांप शुल्क की देयता एवं भारतीय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अंतर्गत उनका पंजीकरण अनिवार्य है। वैसे लिखत का पब्लिक नोटरी द्वारा प्रमाणीकरण कराया जाना आधार पब्लिक नोटरी द्वारा बैनामा/ किरायानामा/ मुख्तारनामा/ इकरारनामा इत्यादि प्रकार के विलेखों को कराया जाता है, यह विधिक रुप से पोषणीय नहीं है, और न ही उसका कोई वैधानिक महत्व है।

*जानकारी न होने के बढ़ती है परेशानी*

एआईजी ने स्वीकार किया कि बहुदा यह देखने में आया है कि विधिक अज्ञानतावश कतिपय लोग बैनामा/ किरायानामा/ मुख्तारनामा/इकरारनामा इत्यादि विलेखों का प्रमाणीकरण पब्लिक नोटरी से कराकर भौतिक कब्जा या परस्पर लेन-देन का कार्य संपादित कर रहे हैं। जबकि इस तरह के विलेखों से संबंधित पक्ष का अचल संपत्ति में कोई वैधानिक स्वत्व सृजित नहीं होता, न किसी सक्षम न्यायालय द्वारा नोटरीकृत ऐसे विलेखों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार ही किया जाता है। किसी भी व्यक्ति के हक में अधिकारों का सृजन निबंधित प्रलेखों से ही प्राप्त होता है।

एआईजी ने लोगों को सलाह दी कि अपने वैधानिक अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए व उसे विधिक रुप से मान्य बनाने हेतु नियमानुसार निबंधन कार्यालय से संपर्क कर अपेक्षित कार्यवाही सुनिश्चित करें। ताकि भविष्य में लेखपत्र विषयक या संपत्ति विषयक किसी विवाद से सदा के लिए सुरक्षित रह सके।

रिपोर्ट आजतक मीडिया– राजेंद्र प्रसाद जायसवाल

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